वादे तमाम करके उजाले मुकर गए

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naveen mani
यूँ तीरगी के साथ ज़माने गुज़र गए।
वादे तमाम करके उजाले मुकर गए॥
शायद अलग था हुस्न किसी कोहिनूर का।
जन्नत की चाहतों में हजारों नफ़र गए॥
ख़त पढ़ के आपका वो जलाता नहीं कभी।
कुछ तो पुराने ज़ख़्म थे पढ़कर उभर गए॥
उसने मेरे जमीर को आदाब क्या किया।
सारे तमाशबीन के चेहरे उतर गए॥
क्या देखता मैं और गुलों की बहार को।
पहली नज़र में आप ही दिल में ठहर गए॥
अरमान भी मिरे थे कि पहुंचेंगे चाँद तक।
इस बेरुखी के दौर में सपने बिखर गए॥
कुछ खैरख्वाह भी थे पुराने शजर के पास।
आई जो आँधियाँ तो वो जाने किधर गए॥
तकदीर हौंसलों से बनाने चला था वो।
आखिर गई हयात सितारे जिधर गए॥

              #नवीन मणि त्रिपाठी

परिचय : नवीन मणि त्रिपाठी कानपुर(उत्तरप्रदेश)के अर्मापुर रियासत में रहते हैंl आपका जन्म १९७५ का हैl 

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।