हिन्द का रखवाला हिम्मतवाला

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aashutosh kumar

कभी न झुकने वाला हिन्द का रखवाला
वो शरहद का सिपाही हिम्मतवाला ।

वो भक्त है हिन्दुस्तान की
देशभक्ति की आवाज है
उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम
की शरहद का रखवाला
वो हिन्द की लहू में बहने वाला
वो तेरा भी तो पहचान है
कभी न झुकने वाला हिन्द का रखवाला
वो शरहद का सिपाही हिम्मतवाला ।

है इतिहास निराली शहीदों की
वीरों की गाथा से भरी पडी
जो कभी न मिटने वाला
चंद देशद्रोहियों की बेड़ियो में
देश नहीं जकड़ने वाला
राष्ट्रप्रेम का प्रतीक वो
अपने शौर्य पराक्रम से
हिन्द का मुरीद वो
कभी न झुकने वाला हिन्द का रखवाला
वो शरहद का सिपाही हिम्मतवाला ।

वो हिन्द का संस्कार है
सभ्यता की पहचान है
लाख कोशिश की है
झुकाने की उनको
फिर भी अपने शरहद पर
अडिग और विराजमान है
कभी न झुकने वाला हिन्द का रखवाला
वो शरहद का सिपाही हिम्मतवाला ।

कोई जाति मजहब नहीं
राष्ट्र के शरहद पर
चौकसी से रक्षा की, चमक विखेर रहा
भटके हुए युवाओं को
अपनी वीरता से
राह दिखाता है
मिटकर शहीदों में
नाम दर्ज कर जाता है
कभी न झुकने वाला हिन्द का रखवाला
वो शरहद का सिपाही हिम्मतवाला ।

कितने आये और चले गये
सब उनपर पर शान करते गये
सहनशक्ति की खान
हिन्दुस्तान की शान
फिर भी न उनको अभिमान है
कभी न झुकने वाला हिन्द का रखवाला
वो शरहद का सिपाही हिम्मतवाला ।

एक बार जो डट जाता
वो पीछे नहीं हट पाता
जहाँ जीतता वो मेरा हो जाता
मुश्किल घड़ी में भी खड़ा रह जाता
ना अचरज ना अचम्भा
दुश्मनों लिए वो बना रहेगा खंभा
वो शरहद पर दुश्मनों का काल  है
कभी न झुकने वाला हिन्द का रखवाला
वो शरहद का सिपाही हिम्मतवाला ।

“आशुतोष”

नाम।                   –  आशुतोष कुमार
साहित्यक उपनाम –  आशुतोष
जन्मतिथि             –  30/101973
वर्तमान पता          – 113/77बी  
                              शास्त्रीनगर 
                              पटना  23 बिहार                  
कार्यक्षेत्र               –  जाॅब
शिक्षा                   –  ऑनर्स अर्थशास्त्र
मोबाइलव्हाट्स एप – 9852842667
प्रकाशन                 – नगण्य
सम्मान।                – नगण्य
अन्य उलब्धि          – कभ्प्यूटर आपरेटर
                                टीवी टेक्नीशियन
लेखन का उद्द्श्य   – सामाजिक जागृति

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।