प्रकाश पर्व

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keshav
प्रकाश पर्व का अभिनन्दन,
सबका ज्योतिर्मय हो अंतर्मन।
हम सब मिलकर दीप जलाएं,
इस धरा से अंधेरा दूर भगाएं।

शुद्ध करें निज मन मन्दिर को,
छोड़ें व्याप्त क्रोध-अनल को
त्यागें मन से लालच-विष को।

विश्वात्म बनें! आत्म मिटाकर,
परमात्म बनें! `मैं` को त्यागकर।

ज्योति पर्व की इस बेला में,
मन का आंगन आलोकित हो।
दीपक जले हर एक दिल में,
सबका तन-मन प्रफुल्लित हो।

पग-पग स्नेह का दीप जले,
लौ से सबका अंधियारा मिटे।

मन का अंधेरा चलें मिटाने को,
फैलाकर अपनी बंधी सीमाओं को।
अपनेपन का सबको अहसास दिलाएँ,
मन के बैर भाव को जड़ से मिटाएँ।

क्योंकि,
अंधकार में जब डूबा हो पड़ोसी,
तो हम अपना घर कैसे सजाएँ।
इसलिए,
भेदभाव,ऊँच-नीच की दीवार ढहाकर,
हम सब मिल-जुलकर पग बढ़ाएँ।

सबको समर्पित ये दीपमालिका,
और श्रृंगारित ज्योतिर्मय तन-मन।
नवल ज्योति से नवप्रकाश हो,
चहुँदिशा यश,वैभव,सुख बरसे।

केशव की ये प्रार्थना,उपजे ज्ञान प्रकाशl
प्रकाश के इस पर्व में,हो सबमें उल्लासll

                                                               #केशव कुमार मिश्रा

परिचय: युवा कवि केशव के रुप में केशव कुमार मिश्रा बिहार के सिंगिया गोठ(जिला मधुबनी)में रहते हैं। आपका दरभंगा में अस्थाई निवास है। आप पेशे से अधिवक्ता हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।