मुस्कुराते हैं

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praveen gahlot

हम तुझे देखकर मुस्कुराते हैं,
रातों में अक्सर गुनगुनाते हैंl

इश्क़ उनको नहीं अगर हम से,
फिर भला ख़्वाब में क्यूँ आते हैंl

दिल को पर्दे में भी लुभाते हैं,
तो वो चेहरा ही क्यूं छुपाते हैंl

पहले से ही घायल हूं मैं तो,
फिर क्यों वो अदाएं दिखाते हैंl

चाहते हैं हद से ज्यादा वो,
राज मुझसे मगर छिपाते हैंl

नहीं मिलती हो दूर रहती हो तुम,
तेरी तस्वीर से हम नैन लड़ाते हैंl

कभी जिनको थी कद्र मेरी,
वो मुझे अब क्यों रुलाते हैंl

चाहत में मेरी कोई कमी तो नहीं,
क्यों भला हमें रोज़ आज़माते हैंl

कतरा हो जाऊंगा एक पल में,
मुझे वो क्यों इतना तड़पाते हैंl

उनसे क्या गिला करना `अरमान`,
गुजरी बातों को अब भुलाते हैंl

#प्रवीण गहलोत(अरमान बाबू)
परिचय :  प्रवीण गहलोत राजस्थान के जोधपुर से हैं l आप लेखन में उपनाम-अरमान बाबू लिखते हैंl हिन्दी के साथ ही उर्दू में भी रचना लिखते हैंl आपकी रुचि कविता,नज़्म,गीत और ग़ज़ल लेखन में हैl 

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।