यादें बचपन की…

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sunil patel
कम्बख्त ये ज़िन्दगी भी कितने दर्द देती है,
कभी भूले तो कभी बिछड़े देती है।
 
 
बचपन में यारों की पीठ पीछे खिलौने देती थी,
अब तो पीठ पीछे यारों के हाथों में ख़ंजर देती है।
 
 
बचपन में गुड्डे-गुड़ियों की शादी में नाचते थे,
अब तो मालिक के इशारों पर नाचते हैं हम।
 
 
बचपन में चुटकियों में तिनकों के आशियाने बना लेते थे,
अब तो बस आशियाना चलाने के लिए दर-दर भटकते हैं हम।
 
 
बचपन में कस्मे-वादे निभाने को सब कुछ छोड़ आया करते थे,
अब तो लोगों को लुभाने के लिए झूठी कसमें खाते हैं हम।
 
 
कम्बख्त ये ज़िन्दगी भी कितने दर्द देती है,
बस पहचान नहीं पाते हैं हम…l 
 
 
बचपन में नंगे पैर मीलों दोस्तों के संग चले जाते थे,
अब तो कुछ दूर भी किसी के साथ चल नहीं पाते हैं हम।
 
 
न जाने कैसे बीत गया वो बचपन,कहां चले गए वो सब,
यादे तो बहुत-सी मगर,अब कहां किसी को याद आते हैं हम।
 
 
बहुत कुछ दिया तूने ऐ ज़िन्दगी,दरख़्वास्त इक करते हैं,
इसी रफ़्तार से पीछे ले चल,फिर बचपन जीना चाहते हैं हम ll 
                                                                #सुनील रमेशचंद्र पटेल
परिचय : सुनील रमेशचंद्र पटेल  इंदौर(मध्यप्रदेश ) में बंगाली कॉलोनी में रहते हैंl आपको  काव्य विधा से बहुत लगाव हैl उम्र 23 वर्ष है और वर्तमान में पत्रकारिता पढ़ रहे हैंl 
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।