मन की व्यथा

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vipin kumar morya

सुबह सुबह तुम श्रंगार सजा कर,
कोमल फूलों को क्यों चुनती हो।
शुर्ख गुलाबी साड़ी में तुम युवती,
फूलों से ज्यादा कोमल लगती हो।

सँभल सँभल कर तुम चुनना ,
इन नन्हे नन्हे कोमल फूलों को।
पौधा भी जलता तुमसे सोना,
ध्यान तुम्हें है रखना आहत न हो।

एक बात जरा तुम बतलाओ,
इतनी उत्सुकता क्यों तुम में ।
या प्रेमी की कथा कहो युवती,
जो हो सारी व्यथा कहो युवती।

क्या तुम्हें बताऊँ प्यारे पथिक,
सालों साल बाद आज उनकी,
अगवानी है अपने देश पथिक,
फूलों से राह सजाऊँगी उनकी।

बस प्रेम कथा का सार है अपना,
बरसों से मैं तरस रही हूँ पथिक,
आज अचानक प्रेम आया अपना,
बस इसी उत्सुकता में हूँ पथिक।

आज का मौसम और भी प्यारा,
बादल की घनघोर घटाएँ छाई,
शायद यह लाई सन्देश काली घटा ,
फिर लौट आया अपने देश पिया।

   #विपिन कुमार मौर्या

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।