भ्रूण बेटी हत्या..

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hema
कुछ दिन पूर्व ही पढ़ा था किसी अखबार के पन्ने पर कि-एक दंपत्ति की शादी के बाद लगातार तीन बेटियां हुई और इस बार पिता को डर लग रहा था कि कहीं फिर से उसको एक बेटी और न…….
इसलिए पिता परीक्षण केन्द्र पहुंचा और पत्नी को डॉक्टर को दिखाता है,जिस पर डॉक्टर ने कहा-यह बेटी है। इतना सुनते ही पिता ने डॉक्टर को आदेश दिया,पर डॉक्टर ने बहुत मना किया। इस पर उस पिता ने पैसे का लालच दिया और बेटे की ख्वाहिश जताई l
इस बात पर वह बेटी क्या कह रही है अपने पिता से-एक बेटी की तरफ से…
मेरे बाबुल ये तुमने क्या कर दिया !
जन्म से पहले ही क्यों विदा कर दिया?
कोई हक न दिया,
कोई हक न लिया
मेरे आने का कर्जा अदा कर दिया,
मेरे बाबुल ये तुमने क्या कर दिया।
पालना न  दिया,
प्यार भी न  दिया
पंख लगने से पहले उड़ा क्यों  दिया
मेरे बाबुल ये तुमने क्या कर दिया?
ऐसा लगता है तुमको खबर लग गई,
मां के आंचल में ही मेरी कबर बन गई
मेरे बाबुल ये तुमने क्या कर दिया?
मैं हूं बेटी तेरी,
तू पिता है मेरा
डोली उठने से पहले कफन क्यों दिया?
मेरे बाबुल ये तुमने क्या कर दिया
मुझको दो जिंदगी,
बनूंगी डॉक्टर बड़ी
जब तुम अपने कदम से चल नहीं पाओगे
तब मेरा हाथ तुमको ही काम आएगा।
क्यों मेरी जिंदगी का सौदा कर दिया,
मेरे बाबुल ये तुमने क्या कर दिया ?
रोग मन का है ये,
दूर कर लो इसे
बेटी,बेटों से कोई है कमतर नहीं,
मेरे बाबुल ये तुमने क्या कह दिया?
                                                                               #हेमा श्रीवास्तव
परिचय :हेमा श्रीवास्तव ‘हेमा’ नाम से लिखने के अलावा प्रिय कार्य के रुप में अनाथ, गरीब व असहाय वर्ग की हरसंभव सेवा करती हैं। २७ वर्षीय हेमा का जन्म स्थान ग्राम खोचा( जिला इलाहाबाद) प्रयाग है। आप हिन्दी भाषा को कलम रुपी माध्यम बनाकर गद्य और पद्य विधा में लिखती हैं। गीत, ‘संस्मरण ‘निबंध’,लेख,कविता मुक्तक दोहा, रुबाई ‘ग़ज़ल’ और गीतिका रचती हैं। आपकी रचनाएं इलाहाबाद के स्थानीय अखबारों और ई-काव्य पत्रिकाओं में भी छपती हैं। एक सामूहिक काव्य-संग्रह में भी रचना प्रकाशन हुआ है।

ई-पत्रिका की सह संपादिका होकर पुरस्कार व सम्मान भी प्राप्त किए हैं। इसमें सारस्वत सम्मान खास है। लेखन  के साथ ही गायन व चित्रकला में भी रुचि है।
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।