तुम्हीं से प्यार…

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sandeep ajnabi
तुम्हीं से प्यार करते हैं
तुम्हीं पे जाँ लुटाते हैं,
मगर चाहत की ये बातें
तुम्हीं से हम छुपाते हैं।
कभी हम दूर जाते हैं
कभी खुद पास आते हैं,
यकीं खुद पे नहीं आता
तभी तो आजमाते हैं।
तुम्हीं से प्यार……….।
मेरे दिल में रहोगे तुम
सदा अहसास बनकर के,
निगाहों में रहोगे तुम मेरी
ही तलाश बनकर के।
कभी दिल से ये कहते हैं।
कभी तुमको सुनाते हैं।
यकीं खुद पे नहीं आता,
तभी तो आजमाते हैं।
तुम्हीं से प्यार……..।
तेरी राहों में अब दिल है
इसे चाहो या ठुकराओ।
तुम्हीं को चाहेंगे हर पल,
मुझे चाहो या न चाहो।
कोशिशें लाख करके भी
ये तुमसे कह न पाते हैं।
यकीं खुद पे नहीं आता,
तभी तो आजमाते हैं।
तुम्हीं से प्यार………।
अगर चाहत नहीं हमसे
सनम हमको बता देना,
मेरे खत की खता पर दिल
जो चाहे वो सजा देना।
भुला पाए न दिल तुमको,
मगर फिर भी भुलाते हैं।
यकीं खुद पे नहीं आता,
तभी तो आजमाते हैं।
तुम्हीं से प्यार करते हैं।
तुम्ही पे जाँ लुटाते हैं।
          #सन्दीप कुमार ‘अज़नबी’
परिचय‬: सन्दीप कुमार ‘अज़नबी’ मूल रुप से उत्तरप्रदेश के उरई(जालौन) के हैं। आपकी जन्म तिथि २ जून १९७६ तथा शिक्षा स्नातक है। वर्तमान में दिल्ली मैट्रो प्रोजेक्ट (सिविल कन्सट्रक्शन मैट्रो टनल) में कार्यरत हैं। काफी समय से लिखने का शौक है।

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29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।