सुंदर कल्पनाएं

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avinash agnihotri
अपने रिटायमेंट के बाद, मनोहर जब अपने पारिवारिक दायित्वों से मुक्ति पाया।तब अपने परिवार व समाज को लेकर उसके मन की कुछ सुंदर कल्पनाएं जो शुरू से ही उसके मन मे बसी थी।जिन्हें वो लाख कोशिशों के बाद भी यथार्थ में नही बदल पाया। तो बुढ़ापे में उसने केनवास पर कूची से मन की उन सुंदर कल्पनाओ में रंग भरना शुरू किये।अब खाली समय मे यह उसका पसंदीदा शौक बन गया।फिर एक दिन जब उसका पोता जब अपने कॉलेज के कुछ दोस्तो के साथ घर आया।और उसने अपने दादाजी की चित्रकारी की प्रशंसा करते हुए वो चित्र अपने दोस्तो को दिखाए।तब घर मे लड़की के होने पर उत्सव मनाता परिवार और घर के बुजुर्ग को उसका हाँथ थामे मंदिर ले जाते युवा।जैसे अनेक चित्र देख सभी बेहद खुश हुए।ओर मनोहर की चित्रकारी की बहुत तारीफ करते हुए बोले ,दादाजी अब आपकी ये सभी उम्दा तस्वीरे हम अपने कॉलेज की वार्षिक प्रदर्शनी में लगाएंगे।तो यह सुन मनोहर की खुशी का ठिकाना न रहा।उसे ऐसा लगा मानो उसके मन की ये सुंदर कल्पनाएं अब यथार्थ रूप ले रही है।
#अविनाश अग्निहोत्री
परिचय- अविनाश अग्निहोत्री
 इंदौर(मध्यप्रदेश)
शिक्षा एम.कॉम 
सेवा सहायक शिक्षक ,सरस्वती ज्ञान मंदिर स्कूल।
अन्य कार्य समिति सदस्य, संस्था विचार प्रवाह।
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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।