कुत्ते की अभिलाषा

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surendra
हमें हमारे कुत्ते से बहुत प्यार है,
क्योंकि हमारा कुत्ता बहुत वफादार है।
हम उस कुत्ते के मालिक हैं,इस बात का हमें नाज़ है,
क्योंकि हमारे कुत्ते के सिर में कुत्तों के सरदारों का ताज है।
उसकी कुत्तानियत और कुत्तत्व के मोहल्ला,
पड़ोस और देश में बात होने लगी,
फिर देश के बड़े-बड़े नेता और अभिनेताओं से उसकी मुलाकात होने लगी।
उसके कुत्तत्व से एक दिन प्रसन्न भगवान हो गए,
कुत्ते को लगा-जैसे उसके पूरे अरमान हो गए।
भगवान बोले-कुत्ते के रुप में तुमने किए हैं अच्छे करम,
इसलिए अगली बार तुम ले सकते हो इंसानों का जनम।
कुत्ता बोला-प्रभु इंसानों के खून में अब कहां रही सच्चाई और ईमानदारी है ??
हम भले ही जानवर और कुत्ते हैं,लेकिन हमारी रगों में आज भी वफादारी है।
कुत्ता हाथ जोड़कर बोला-हे प्रभु,मेरी बस एक अरज सुन लीजो,
अगले जन्म मोहे कुत्ता ही कीजो…
अगले जन्म मोहे कुत्ता ही कीजो॥
                                                               #सुरेन्द्र ठाकुर ‘अज्ञानी जी’

matruadmin

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।