दिल को चीरती निकलती ‘बेग़म जान'(समीक्षा)

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edris

इस फ़िल्म का विषय दर्द के साथ चुभन पैदा करता है। फ़िल्म को पहले दृश्य से ही साधे रखा है श्रीजीत मुखर्जी ने। यह फ़िल्म श्रीजीत की ही बंगला फ़िल्म ‘बाजकहिनी’ का हिन्दी रीमेक है। फ़िल्म का ताना-बाना आज़ादी के बाद इंडो-पाक बंटवारे की रेखा है,जिस पर एक कोठा ओर वेश्यालय है। इस पर सल्तनत बेगम जान की चलती है,और बेगम कोठा छोड़ने को तैयार नहीं है।
सबसे पहले बात करते हैं पटकथा और संवादों की,तो शानदार संवाद जो पुरुष प्रधान समाज पर करारा तमाचा करते हैं।
कलाकारों की बात करें, तो कास्टिंग मुकेश छाबड़ा ने सटीक और शानदार की है। विद्या ने पूरी ईमानदारी ओर शिद्दत से सात्विक अभिनय के आवरण को जिया है। एक बात और कि, सभी कलाकर अपनी अदायगी बयाँ करते नज़र आते हैं। इला अरुण अलग-अलग कहानी सुनाती नज़र आती है,जो लाजवाब है।
गौहर खान मर्द को औरत होने का मतलब समझाती है,यहां दृश्य काबिले गौर है।
पल्लवी शारदा प्रियंका सेटिया लाजवाब रही हैं तो फ़िल्म में आशीष और रजत कपूर के साथ नसीरुद्दीन का तड़का लाजवाब है। ये तीनों सर्वमान्य सिद्ध अभिनेता हैं। इन सबके बीच चंकी पांडे शानदार किरदार निभा गए हैं। विद्या बालन ने जिस शिद्दत ओर ईमानदारी से किरदार को जीवंत बनाया है,वह मेहनत और लगन पर्दे पर देखते ही बनती है।
फ़िल्म धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ेगी,क्योंकि विद्या की फिल्में धीरे -धीरे ही रफ्तार बनाती है।
इस फ़िल्म की बड़ी कमी यह है कि, यह फ़िल्म न तो मनोरंजक सिनेमा में है और न ही समानांतर सिनेमा में..। फ़िल्म में ऐतिहासिक घटना के साथ कल्पना का मिश्रण किया गया है जो भट्ट कैम्प को राहत देती दिख रही है।
फिर भी फ़िल्म देखना बनती है।
फ़िल्म का फिल्मांकन भी दिव्य पुरी का शानदार है,जो पहले सीन से ही छाप छोड़ता है। संगीत ने फ़िल्म का हर मोड़ पर साथ निभाया है। राहत इंदौरी का गाना भी लाजवाब है।
राहत और अन्नू पहले भी काम कर चुके हैं।
संजीदा विषय, बेहतरीन फिल्मांकन और संगीत का तालमेल सब कुछ शानदार है इस फिल्म में। इसकी टक्कर हॉलीवुड की बड़ी फ़िल्म फास्ट 8 वे भाग से है,इसके साथ ही प्रदर्शित हुई है।

                                                                         #इदरीस खत्री

परिचय : इदरीस खत्री इंदौर के अभिनय जगत में 1993 से सतत रंगकर्म में सक्रिय हैं इसलिए किसी परिचय यही है कि,इन्होंने लगभग 130 नाटक और 1000 से ज्यादा शो में काम किया है। 11 बार राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नाट्य निर्देशक के रूप में लगभग 35 कार्यशालाएं,10 लघु फिल्म और 3 हिन्दी फीचर फिल्म भी इनके खाते में है। आपने एलएलएम सहित एमबीए भी किया है। इंदौर में ही रहकर अभिनय प्रशिक्षण देते हैं। 10 साल से नेपथ्य नाट्य समूह में मुम्बई,गोवा और इंदौर में अभिनय अकादमी में लगातार अभिनय प्रशिक्षण दे रहे श्री खत्री धारावाहिकों और फिल्म लेखन में सतत कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।