तू उदास न हो प्रिये,

Read Time1Second
sunil namansunil naman
इस बार
सरसों की फसल अच्छी होगी
सरसों के पीले फूल खिल रहे हैं
बौर भी अच्छा ही आएगा
फिर भण्डार भर जाएगा।
सरसों के फूलों की खुशबू बता रही है,
अच्छे शगुन ला रही है
गीत पुरवाई संग गा रही है
बहारें इस बार तो होंगी जरूर
ईश्वर कभी तो देता है छप्पर फाड़ के,
अब फटेहाल नहीं रहूंगा
बदन पर नए-नए लिबास लिपटे होंगे,
तुझे भी नई साड़ी  दिलवाऊंगा,
घर सपनों का जरुर बनाऊंगा।
टूटी-फूटी झोपड़ी से अब तू भी ऊब चुकी होगी,
बरसात में अब पानी नहीं टपकेगा।
धूप की चंद लकीरें जो प्रवेश कर जाती है झरोखों से,
अबकी बार न आने पाएंगी,
उम्मीद का दीया अब तो जलेगा
हर बार की तरह बुझने न पाएगा
अब आधे भूखे पेट न तू सोएगी और न मैं ही सोऊंगा,
जग में सबके पेट के लिए अन्न होगा।
हरियाली से सरोबार खेत है
खलिहान अब खाली नहीं होगा,
जेबें सारी पैसों से भर जाएंगी
किसान अबके बरस रोएगा नहीं
खुशियों की बाढ़ आएगी,
रंगोली,होली और दीवाली अब तू भी सजाएगी।
सुन जरा,
मेरी बात ध्यान से सुन
मेरे पास बैठकर जरा गम कम कर ले,
सरसों से झोली तू आज भर ले
सुकून मेरी बातों को सुनकर मिलेगा जरूर,
तू भी लगेगी अब तो कोई हूर
आ बैठ जरा दो पल,
खुशियों से सरोकार कर लें
मन था बरसों से जो भारी उसे थोड़ा-सा हल्का कर ले
गालों पर हसीं ले आ,
उदासी तो अब न गले लगा॥
परिचय :सुनील कुमार लेखन के क्षेत्र में धार्विक नमन नाम से जाने जाते हैं। आप वर्तमान में डिब्रूगढ़ (असम)में हैं,जबकि मूल निवास झुन्झुनूं (राजस्थान) है।  शैक्षणिक योग्यता एम.ए. (अंग्रेजी साहित्य,समाज शास्त्र,)सहित एम.एड., एमफिल और बीजेएमसी भी है।
0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

शब्द नहीं मौन

Tue Jun 13 , 2017
बाहर भी दिखा था, भीतर भी दिखा था लफ्ज़ कुछ शातिर थे लफ्ज़ कुछ कातिल थे शब्द कुछ दोस्त थे शब्द कुछ दुश्मन थे दिल में समेटे हुए लफ्ज़ सभी मौन थे। एक सैलाब आया, आंधी की तरह और लफ्जों के बांध को तोड़ दिया,वहां लेखनी खड़ी थी और आपने […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।