जंग लगे आईने में अक्स देखता हूँ अंदाज देखता हूँ तस्वीर धुंधली दिखती है पर दिखती तो है… बूढ़ा आईना भी… अपना काम करता है ताज्जुब है… समय की लकीरों से… आबोहवा से… आईनों के बदल गये है … स्वरूप… आधुनिकता का रंग… चढ़ गया है… लेकिन… आईना है आखिर […]

रौशनदान से देखो हलचल बाहर की… कोई बहार का टुकड़ा… इधर आया है झूम रहा है अंबर कलरव कर रहे खग कोयल कूक सुहानी हवा मस्तानी बरखा की बूंदे रिमझिम हरितिमा फैली पंख फैला रहे पक्षी झूम रहे कलकल बहती नदियां वो पहाड़ भीग रहा है भीग रही वो झोपड़ी […]

इस दीवाली तुम भी तो मिट्टी के दीप जलाना। कुम्हार के मेहनतकश हाथों की रौनक बढ़ाना॥ मिट्टी के दीपों में बाती तेल की खुशबू , दीवाली की रंगत बढ़ाएगी। दीए बेचने वाली बूढ़ी अम्मा,आशीर्वाद हाथ तभी लहराएगी॥ इस दीवाली तुम भी तो मिट्टी…। चाइनीज लड़ियों में कृत्रिमता भरी पड़ी है। […]

  भारतवर्ष में हिन्दी एक वरदान है, हिन्दी ने बनाई विश्व में अपनी पहचान है। हर अक्षर में हिन्दी अमृत घोलती, भारत की जनता है जो हिन्दी बोलती। शब्द-शब्द इसका प्राणवायु संस्कृति की फूंकता, जग सारा हिन्दी के इर्द-गिर्द ही घूमता। भारत के मस्तक की भाल है हिन्दी, भारत की […]

ये जो भोजन की थाली है, हर समय लगती क्यों मुझे खाली-खाली है। मैं भूख से बिलखता सदा, रोटी मिलती क्यों यदा-कदा। देखो-देखो मेरा हाल, भूखा क्यों आज किसी मां का लाल। अंतड़ियां मेरी सूख गई, भूख मुझे ही क्यों लग रही। मुझे तो चांद भी अब रोटी लगता है, […]

इस बार सरसों की फसल अच्छी होगी सरसों के पीले फूल खिल रहे हैं बौर भी अच्छा ही आएगा फिर भण्डार भर जाएगा। सरसों के फूलों की खुशबू बता रही है, अच्छे शगुन ला रही है गीत पुरवाई संग गा रही है बहारें इस बार तो होंगी जरूर ईश्वर कभी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

आपका जन्म 29 अप्रैल 1989 को सेंधवा, मध्यप्रदेश में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर हुआ। आपका पैतृक घर धार जिले की कुक्षी तहसील में है। आप कम्प्यूटर साइंस विषय से बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कम्प्यूटर साइंस) में स्नातक होने के साथ आपने एमबीए किया तथा एम.जे. एम सी की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। आपने अब तक 8 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया है, जिसमें से 2 पुस्तकें पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं। मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष व मातृभाषा डॉट कॉम, साहित्यग्राम पत्रिका के संपादक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मध्य प्रदेश ही नहीं अपितु देशभर में हिन्दी भाषा के प्रचार, प्रसार और विस्तार के लिए निरंतर कार्यरत हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 21 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया। इसके अलावा आप सॉफ़्टवेयर कम्पनी सेन्स टेक्नोलॉजीस के सीईओ हैं और ख़बर हलचल न्यूज़ के संस्थापक व प्रधान संपादक हैं। हॉल ही में साहित्य अकादमी, मध्य प्रदेश शासन संस्कृति परिषद्, संस्कृति विभाग द्वारा डॉ. अर्पण जैन 'अविचल' को वर्ष 2020 के लिए फ़ेसबुक/ब्लॉग/नेट (पेज) हेतु अखिल भारतीय नारद मुनि पुरस्कार से अलंकृत किया गया है।