यातायात की समस्या से जूझता इन्दौर, समय रहते जागरुकता ज़रूरी

2 0
Read Time7 Minute, 33 Second

शिखा अर्पण जैन, इन्दौर

आधुनिक युग में बहुत सारी समस्याओं का सामना हमें करना पड़ रहा है, उसमें सबसे बड़ी समस्या है यातायात की समस्या। ये कुछ लोगों के लिए समस्या नही होगी, पर आप अगर महानगरों की बात करें जैसे दिल्ली, मुम्बई, बेंगलुरू, इंदौर तो यहाँ यातायात की सुगमता एक बहुत बड़ी समस्या बन चुका है। अगर यहाँ पर लोगों को एक जगह से दूसरी जगह जाना होता है तो वो काफ़ी सोचते हैं और लगता है फ़ोन पर बात कर लेते हैं, क्योंकि जाने-आने में जितना समय लग जाएगा, उतना तो हम उनको समय भी नही दें पायेंगे।

अगर हम बात करें हमारे इंदौर शहर की तो वो भी समस्या से अछूता नहीं है। चाहे हम स्वच्छता में नंबर एक पर हैं पर हम यातायात में अभी बहुत पीछे हैं। कई बार तो हमें किसी के यहाँ जाना होता तो भी समय का सोच कर निकलना पड़ता है। अगर शाम को 6 बजे से लेकर रात 9 बजे के बीच निकल गए तो जाने-आने में बहुत समय लग जायेगा। आज देखें तो हर किसी के पास गाड़ी है और हर किसी को जल्दी है, अगर हम ट्रैफ़िक सिग्नल की ओर हमारी दृष्टि ले जाएँ तो इन्दौर में इस समय सिग्नल तोड़ना, जाम का कारण बनना युवाओं के लिए बहुत गर्व की बात होने लगी है। और अगर ग़लती से पुलिस को कहीं दिख गए तो उनसे नज़रें चुरा कर भागने में लगे रहते हैं। पर हम ये नहीं सोचते कि उसमें नुकसान हमारा ही है। क्योंकि ये थोड़ी-सी जल्दीबाज़ी तो बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
रोज़ सुबह हर किसी को ऑफ़िस या दुकान जाने की जल्दी और शाम को घर जाने की जल्दी रहती है, पर हम इस जल्दी में ये भूल जाते हैं कि हम अपनी जान के साथ खेल रहे हैं।
इस समय बारिश का मौसम शुरू हो चुका है, शहर में जगह-जगह पानी भर जाता है, जिसमें दुपहिया वाहन बहुत जल्दी फिसल जाते हैं। बावजूद इसके लापरवाहियाँ चरम पर हैं। आए दिन हम दुर्घटनाएँ देख रहे हैं, फिर भी सबक न लेना इंदौरी मिज़ाज़ बनता जा रहा है।
हम हमारे शहर इंदौर को देखें तो यहाँ की कुछ गलियाँ इतनी संकरी हैं कि आदमी बस वहाँ पैदल ही आसानी से चल सकता है, पर लोग सुनते ही कहाँ है। कहीं पर भी गाड़ी खड़ी कर दी और निकल गए। उस अव्यवस्था से कितने लोग परेशान होंगे उससे लोगों को क्या। बस हमारा काम होना चाहिए इसी सोच में लोगों में अपनी दुकानों और घरों को भी इतना बड़ा कर लिया है या यूँ कहें कि अतिक्रमण इतना कर लिया है कि सड़कों पर ठीक से चलने की भी जगह नहीं बच रही।
इन्हीं सब कारणों से शहर की यातायात समस्याओं का जंजाल शहर को इस क्षेत्र में अव्वल नहीं बनने दे रहा। शासकीय रूप से तो जो व्यवस्थाएँ चाक चौबन्ध होना है, वह होगी किन्तु शहर की स्वयंसेवी संस्थाओं और नागरिकों को भी जागरुक होना पड़ेगा। स्कूलों-कॉलेजों में यातायात के प्रति जागरुकता के लिए सेमिनार इत्यादि होने चाहिए। नगरीय लोगों को सड़क पर चलने के नियमों को सीखने का काम किया जाना चाहिए, यातायात नियमों के प्रति एक सप्ताह ही नहीं मनाना चाहिए बल्कि वर्षभर इस तरह की गतिविधियों को संचालित कर जागरुक बनाना होगा। यह भार शासकीय व ग़ैर शासकीय संस्थाओं को लेते हुए बच्चों से लेकर बड़ों तक को निभाना होगा। पालकों को भी अपने बच्चों को अवयस्क होने पर दुपहिया या चौपहिया वाहनों को चलाने के लिए नहीं देना चाहिए। हम आए दिन वाहन दुर्घटनाओं का सैलाब शहर में देखते हैं, इसके मूल में सुनियोजित यातायात व्यवस्थाओं के साथ साथ ग़ैर ज़िम्मेदाराना व्यवहार से वाहन चालन भी है। युगनिर्माण के संस्थापक आचार्य पण्डित श्रीराम शर्मा जी लिखते हैं कि ‘हम सुधरेंगे-जग सुधरेगा’ इसी तर्ज़ पर शहर के सभी जागरुक लोगों को स्वयं से शुरुआत करते हुए अन्यजनों की प्रेरणा बनना चाहिए। जिस तरह आज स्वच्छता इन्दौर की आदत हो गई है उसी तरह यातायात नियमों का अनुपालन और सुचारू, सुगम यातायात व्यवस्था भी इन्दौर के गौरव में अभिवृद्धि करेगी।

शिखा अर्पण जैन

लेखिका व उद्यमी, इन्दौर
कोषाध्यक्ष, मातृभाषा उन्नयन संस्थान,
इन्दौर, मध्यप्रदेश

परिचय
नाम : शिखा जैन
पति : डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’
माता : श्रीमती राजेश्वरी जैन
पिता : श्री शरद ओस्तवाल
जन्म : 04 सितम्बर
भाषा ज्ञान : हिन्दी, अंग्रेज़ी
शिक्षा – स्नातक (बी.कॉम) विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन, एम.कॉम स्नातकोत्तर विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन

सम्प्रति – सह-संस्थापक , सेंस टेक्नोलॉजीस,
संस्थापक, संस्मय

राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, मातृभाषा उन्नयन संस्थान

कोषाध्यक्ष, वृन्दाविहान बहुउद्देशीय संस्था

विशेष – कई वर्ष से प्रकाशक/प्रकाशन के क्षेत्र में दख़ल, साथ ही, संस्मय प्रकाशन की संस्थापक, मातृभाषा उन्नयन संस्थान की राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष होने के साथ ही हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार एवं हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा दिलवाने के लिए जारी आन्दोलन का हिस्सा हूँ। हिन्दीग्राम की संयोजिका।

लेखन
• कविताएँ एवं लेख
• कई पुस्तकों का संपादन किया।
• प्रकाशित – समाचार पत्र – पत्रिकाओं में विभिन्न विषयों पर कविता एवं लेख प्रकाशित

सम्पादन
● वुमन आवाज़
● नारी से नारी तक
● स्त्रीत्व
● आधी आबादी
● कोरोनाकाल एवं साहित्य ग्राम
● प्रथम सृजक

सम्मान
● चित्रगुप्त सम्मान
● वुमन मीडिया अवॉर्ड 2020
● नई कलम सम्मान

matruadmin

Next Post

उम्मीद से हो क्या...

Sun Jul 10 , 2022
अक्सर होने वाली माँ के लिए कहा गया, उम्मीद से हो क्या क्या होता है उम्मीद से होना उम्मीदें जिंदगी को बेहतरी से जीने का हौसला देती हैं, ये वो खुशी, वो अहसास है जो उसे औरत से माँ बना देती है किसी को बेशुमार प्यार करने की चाहत देती […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।