बांग्लादेश में कवि सुनील चौरसिया ‘सावन’ ‘समानता का आकाशदीप’ से सम्मानित

1 0
Read Time3 Minute, 2 Second

अपने साहित्य से संसार में एकता, समरसता एवं समानता की खुशबू बिखेरने वाले कवि सुनील चौरसिया ‘सावन’ को बांग्लादेश का साहित्यिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक मंच ‘द ड्रीम ऑफ इक्वालिटी’ ने ‘समानता का आकाशदीप’ (बेकन ऑफ इक्वालिटी) सम्मान से नवाजा। इस वैश्विक मंच के संस्थापक डॉ. समर भौमिक ने ‘सावन’ को सम्मानित कर आपके उज्जवल भविष्य की कामना की। इस संस्था का मूल उद्देश्य है – जगत में एकता , समरसता एवं समानता की सरिता को प्रवाहित कर भाईचारे के भाव को पल्लवित पुष्पित करना।
ग्राम- अमवा बाजार, पोस्ट- रामकोला, जिला- कुशीनगर, उत्तर प्रदेश निवासी कवि ‘सावन’ ने दोनों देशों के बीच मधुर संबंध स्थापित करते हुए एवं समरसता का कुसुम खिलाते हुए कहा कि हमारा खून का रिश्ता है । हम एक थे, एक हैं और एक रहेंगे। गंगा मैया अपने दोनों बालकों (भारत और बांग्लादेश) को अपनी गोद में पालती है । हम सब भाई – भाई हैं ।
केंद्रीय विद्यालय टेंगा वैली अरुणाचल प्रदेश में स्नातकोत्तर शिक्षक हिन्दी पद पर अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे सुनील चौरसिया ने अपने सद्य प्रकाशित काव्य संग्रह ‘हाय री! कुमुदिनी’ से ‘आसान नहीं है भाई’, ‘मैं कौन हूं’, ‘पत्थर बनकर गुलाब होना’, ‘देश के बच्चे कितने सच्चे’, ‘दिल में देशभक्ति’, ‘बात कहें सांचे सुनील चौरसिया, ‘ताजमहल’, ‘कुहू – कुहू बोले रे कोयलिया’ इत्यादि कविताएं भी सुनाईं जिसे भारत और बांग्लादेश के विद्वानों स्राबन्ती गायेन, मीरा मुर्गुल, स्नेजाना मिलोवानोव, अनामिका मजमूदार , अर्चना पाण्डेय, तपन, चन्दन दास, अमर ,बिप्लोब, मल्लिका, मुहेदिन महिलाज इत्यादि ने खूब सराहा।

राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न सम्मानों से सम्मानित  कवि 'सावन'  के दो काव्य संग्रह भी प्रकाशित हो चुके हैं । आपके जीवन पर आधारित डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी बनी हुई है। विदेश में सम्मानित होने पर कवि 'सावन' के साथियों एवं शुभचिंतकों ने बधाइयां दीं। क्षेत्र में खुशी एवं जश्न का माहौल है।

matruadmin

Next Post

साहित्य संगम संस्थान द्वारा रामचरित काव्यामृतम कार्यक्रम सम्पन्न

Fri Aug 6 , 2021
“उमा महेश्वर जय सुख दाता , शब्द अर्थ दो भाग्य विधाता” – लोकेन्द्र कुम्भकार साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा 16 जुलाई से 31 जुलाई के बीच पांच चौपाई सृजन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवनी पर आधारित रामचरित काव्यामृतम चौपाई छंद सृजन का भव्य आयोजन किया गया था, जिसका परिणाम 05/08/2021 […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।