साहित्य संगम संस्थान द्वारा रामचरित काव्यामृतम कार्यक्रम सम्पन्न

1 0
Read Time5 Minute, 47 Second

“उमा महेश्वर जय सुख दाता , शब्द अर्थ दो भाग्य विधाता” – लोकेन्द्र कुम्भकार

साहित्य संगम संस्थान दिल्ली द्वारा 16 जुलाई से 31 जुलाई के बीच पांच चौपाई सृजन मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवनी पर आधारित रामचरित काव्यामृतम चौपाई छंद सृजन का भव्य आयोजन किया गया था, जिसका परिणाम 05/08/2021 को घोषित किया गया,ज्ञातव्य हो कि इस आयोजन के संयोजक आशीष पाण्डेय जिद्दी सचिव मध्यप्रदेश इकाई, पूर्व अनुशासन प्रमुख साहित्य संगम संस्थान थे। समीक्षा के उपरांत चयनित काव्य मनीषियो पंक्तियों में लोकेन्द्र कुम्भकार शाजापुर मध्यप्रदेश “उमा महेश्वर जय सुख दाता , शब्द अर्थ दो भाग्य विधाता”,नरेश द्विवेदी शलभ फर्रुखाबाद उप्र “प्रातकाल प्रभु ऋषिजन बोले,खल दल दलन हेतु मुख खोले”,डॉ मीना कौशल प्रियदर्शिनी गोंडा उप्र “नमन वाक् देवी कल्याणी।बसहुं हृदय मानस मम वाणी”राजेश कुमार कौरव गाडरवारा मध्यप्रदेश “देख अवध सूना सिंहासन,रामहि सौंप दिया गुरु आसन” लाजबाव सृजन रहा,इस आयोजन मे देश भर से जुड़े साहित्यकारों में से
डाॅ. पं. रामसेवक पाठक “हरिशंकर” , आर. बी. सिंह परिहार, नरेश द्विवेदी,श्री के एल महोबिया,डॉ. मीना कौशल,संजय गुप्ता “देवेश”, ज्योति मिश्रा,सुनील कुमार अवधिया,सत्यदीप शर्मा,राजेश कौरव,मोनिका प्रसाद, ब्रह्मनाथ पाण्डेय “मधुर”,विमल सागर ,इंदु शर्मा “शचि” ,भवानी दुबे,सुषमा खरे,अनुराधा तिवारी “अनु”,लोकेन्द्र कुंभकार ,प्रमोद पाण्डेय,सरोज शुक्ला,ईश्वरचंद्र जायसवाल,अनीता जोशी,प्रेमलता कोहली,जयश्री कांत “जय”,भरतलाल गौतम,रंजना बिनानी “काव्या”,विद्या दास ,सिम्मी नाथ,प्रेमलता उपाध्याय,राजवीर सिंह “मंत्र”,संगीता चमोली, कुसुमलता “कुसुम, कुमकुम सिन्हा ,राजेश तिवारी “मक्खन”, ज्योति सिंह बेदी “येशु” ,कुमारी निरुपमा, केशव कुमार मिश्रा,श्रीकांत “तैलंग”,सुनीता बाहेती उपस्थित हुए,कार्यक्रम के समीक्षक छंदाचार्य शैलेन्द्र खरे “सोम” गुरुदेव की समीक्षा और निर्णय के आधार पर श्री लोकेंद्र कुंभकार जी शाजापुर मध्यप्रदेश एवं आ० नरेश द्विवेदी जी फर्रुखाबाद उप्र प्रथम डाॅ मीना कौशल जी गोंडा उप्र द्वितीय एवं आ० राजेश कौरव “सुमित्र” जी गाडरवारा मध्यप्रदेश को तृतीय स्थान घोषित करते हुए सभी विजेताओं सहित समस्त प्रतिभागियों एवं सुधी पाठकों को इस कार्यक्रम में सम्मिलित होकर सफल बनाने के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी, संयोजक आशीष पाण्डेय जिद्दी ने बेहतरीन ढंग से संचालित चौपाई रामचरित काव्यामृतम कार्यक्रम की सराहना करते हुए इस कार्यक्रम में सम्मिलित सभी मनीषियों को बधाई देते हुए आगामी 16 अगस्त 2021 को होने वाले चौपाई शाला उद्धाटन समारोह में सम्मिलित होने के लिए अधिक से अधिक साहित्यकारों को आमंत्रित करते सभी का आभार ज्ञापित किए। नवीन कुमार भट्ट नीर साहित्य संगम संस्थान द्वारा आयोजित चौपाई छंद पर आधारित रामचरित काव्यामृतम कार्यक्रम बहुत ही सार्थक ढंग से संचालित हुआ इसका श्रेय इस कार्यक्रम में सम्मिलित मनीषियों, समीक्षकों एवं संयोजक को जाता है इसके लिए सभी बधाई के पात्र हैं, छंदाचार्य शैलेन्द्र खरे सोम द्वारा चयनित सभी विभूतियों को बधाई देता हूं, साहित्य संगम संस्थान अपने नये शीर्ष पर ऐसे ही अद्वितीय कार्यक्रम आयोजित करता रहे, मुझे विश्वास है कि 16 अगस्त 2021 को होने वाले चौपाई शाला का उद्घाटन समारोह निश्चित ही कामयाबी की मिशाल साबित करेगा, समस्त काव्य मनीषियों से आग्रह करूंगा कि उद्धाटन समारोह में उपस्थित होकर साहित्य संगम संस्थान के इस कार्यक्रम को सफलता प्रदान करें,,सभी को पुनः बधाई

जय हिन्दी
नवीन कुमार भट्ट नीर

matruadmin

Next Post

जोंक

Fri Aug 6 , 2021
रोपनी जब करते हैं कर्षित किसान ; तब रक्त चूसते हैं जोंक! चूहे फसल नहीं चरते फसल चरते हैं साँड और नीलगाय….. चूहे तो बस संग्रह करते हैं गहरे गोदामीय बिल में! टिड्डे पत्तियों के साथ पुरुषार्थ को चाट जाते हैं आपस में युद्ध कर काले कौए मक्का बाजरा बांट […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।