जिंदगी क्या है….

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फूल बन कर
मुस्कराना जिंदगी है।
मुस्कारा के गम
भूलाना जिन्दगी है।
मिलकर लोग खुश
होते है तो क्या हुआ l
बिना मिले दोस्ती
निभाना भी जिंदगी है l।

जिंदगी जिंदा दिलों
की आस होती है।
मुर्दा दिल क्या खाक
जीते है जिंदगी।
मिलना बिछुड़ जाना
तो लगा रहता है ।
जीते जी मिलते
रहना ही जिंदगी है।।

जिंदगी को जब तक
जिये शान से जीये।
अपनी बातों पर
अटल रहकर जिये ।
बोलकर मुकर जाने
वाले बहुत मिलते है।
क्योंकि जमाना ही आज
कल ऐसे लोगो का है।।

मेहनत से खुद की
पहचान बना कर।
जीने वाले कम
ही मिलते है ।
प्यार से जिंदगी जीने
वाले भी कम मिलते है।
वर्तमान को जीने वाले
ही जिंदा दिल होते है।।

प्यार से जो जिंदगी
को जीते है।
गम होते हुए भी
खुशी से जीते है।
ऐसे ही लोगों की
जीने की कला को।
हम लोग जिंदा
दिली कहते है।।

जय जिनेन्द्र देव
संजय जैन, मुम्बई

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