हम जात पात में पड़े रहेंगे। और देश को बर्बाद करेंगे। दूसरे देश प्रगति को चुनेंगे। और विश्व में पहचान बनाएंगे।। गये थे जब अंग्रेज देश से तो जाती का बीज वो गये थे। जिससे आपसी भाई चारा देश में स्थापित न हो पाये। और लड़ते रहो आपस में जातीधर्म […]

सद्कर्मो से भाग्य है बनता सत्पुरुष सद्कर्मों से जन्मता अहंकार पलभर में मिटता इंसानियत का उदय हो जाता सद्कर्मो से हीे मिटते है विकर्म इसी से बन जाता पावन मन सद्कर्म ही है परमार्थ का पथ इसपर चलने से बनते समर्थ छोड़ दो जीवन के सब व्यर्थ स्वयं पा जाओगे […]

कभी गमो का साया भी नहीं पड़े तुम पर। खुशी की गीत गाओ उदासियों की महफ़िल में। बहुत सुकून मिलेगा मायूसो के चेहरे पर। महफ़िल में रोनक आ जायेगी तुम्हारे गीतों को सुनकर।। मिले गमो का साया भी, उसको भी गीत बना लेंगे। तेरी जुल्फों की साया में हम सारी […]

सुनता हूँ जवानो की गाथा आज आँसुओं को भरके। गोलिया खाते है सीने पर घायल दिल होता है। चोट खाकर भी जवान हँसता मुकरता रहता है। खाई है जो कसम इन्होंने देश पर मर मिटने की।। आंच आने नहीं देंगे देश की शान पर। गोलियाँ खायेंगे मर जायेंगे पर दुश्मनो […]

मैं हिन्दी का बेटा हूँ हिन्दी के लिए जीत हूँ। हिन्दी में ही लिखता हूँ हिन्दी को ही पड़ता हूँ। मेरी हर एक सांस पर हिन्दी का ही साया है। इसलिए मैं हिन्दी पर जीवन को समर्पित करता हूँ।। करें हिन्दी से सही में प्यार भला कैसे करे हिन्दी लिखने […]

तन की खूबसूरती एक भ्रम है..! जो इंसान को घमंडी बना देता है। मन की खूबसूरती ही असली सुंदरता है। जो दिलको शांत और मनको व्यवहारिक बनता है। सब से खूबसूरत तो आपकी “वाणी” है..! जो चाहे तो दिल जीत ले.. या चाहे तो दिल चीर दे !! वाणी की […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।