तड़पते लोग विलखते परिजन जिम्मेदार कौन –?

0 0
Read Time3 Minute, 15 Second

भारतीय संविधान में मूल अधिकारों का हनन एक संगीन मामला बन जाता है जब परिवार में किसी की मौत हो और उसके अंतिम दर्शन तक न हो।मीडिया और सोशल मीडिया पर दर्द विदारक रिपोर्टो ने क्रूरतापूर्ण रवैये के इस प्रचंड रूप का आये दिन वर्णन किया है।लेकिन सिस्टम का इसपर भी कोई प्रभाव पड़ता नही दिखता।वैसे देखा जाय तो ऐसे कितने परिवार होगे जिनके अपने अस्पताल गये तो फिर उनसे पुनः भेंट तक नही हुई।यह कैसी व्यवस्था और कैसा इलाज क्या देश की संविधान पीठ मूक दर्शक बनी रहेगी?क्या यह मानवाधिकार का हनन नही है?जब तमाम राज्य सरकारें और केन्द्र सरकारें जानती थी कि कोरोना विस्फोट कभी भी हो सकता है तो पहले से ऑक्सीजन और दवाईयों स्टाक क्यों नही किया गया?कई ऐसे प्रश्न हैं जो आने वाले समय में पूछे जाएँगें।

स्वास्थ्य सेवाओं की विफलता राज्य सरकारों की कलई खोलता नजर आने लगा है ।बहुत सारी समस्याएं हैं जो की चरम पर है। देश की तमाम सरकारें इस महामारी से निपटने के लिए कोई इंतजाम पहले से क्यों नहीं किया? सरकारें सिर्फ चुनावी रैली करेंगी जबकि देश सुनसान होता जा रहा है क्या यही लोकतंत्र है? देश की संविधान पीठ की कई फैसले को भी राज्य सरकारे नही मानती क्या संवैधानिक व्यवस्था का सरकार पालन नही करेंगी जिसमें नागरिको की रक्षा सुरक्षा औषधि और मानवाधिकार की रक्षा के साथ न्याय सर्वोपरि है।

आज देश मे तकरीबन 4 लाख नये मरीज और 3 हजार रोजाना मौत आखिर किसकी नाकामी है।क्या जब सबकुछ ऑन लाइन हो सकता है तो चुनाव जैसी जटिल प्रक्रिया को हरी झंडी क्यों दिया गया? आज बिहार मजदूरों की वजह से नहीं अपितु चुनाव की वजह से कोरोना का हब बना हुआ है? धीरे धीरे यह जहर फैलता चला गया ।तमिलनाडू की भी यही स्थिति है और आने वाले समय में बंगाल और असम की भी यही स्थिति होने वाली है? जब पिछले एक वर्षों से सभी शिक्षण संस्थानों को बंद कर दिया गया और ऑनलाइन किया गया तो प्रचार और रैली जैसी विशाल भीड़ को रोकने की व्यवस्था क्यों नही की गयी? प्रचार ऑन लाइन क्यों नही किया गाय? क्या देश में जान माल की सुरक्षा सर्वोपरि है या चुनावी प्रक्रिया?

आशुतोष
पटना बिहार

matruadmin

Next Post

कोरोना की द्वितीय लहर

Thu Apr 29 , 2021
कोरोना की द्वितीय लहर ने ऐसा कहर बरपाया है कि चारों ओर त्राहिमाम -त्राहिमाम मची है । कोरोना की प्रथम लहर से भारत जीता था और इस बार भी महामारी से हम निश्चित ही फिर से जीतेंगे । प्रथम बार भारत में कोरोना ने इतना कहर नहीं ढाया था, जितना […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।