खुद पर भरोसा

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खुद पर भरोसा है तो
खुदा भी तेरे साथ है।
अपने पर भरोसा है तो
हर दुआ तेरे साथ है।
जिंदगी से कभी भी
मत हारना मेरे दोस्त।
जब तक तेरे साथ
इंसानियत रहेगी।
तब तक लोगों के
दिलों में तेरा राज है।।

ख्वाहिश ये बेशक नहीं
की तारीफ हर कोई करें।
मगर कोशिश सदा ये
जरूर मेरी रहती है।
की कम से कम कोई
बुराई भी न करें।।

इंसानियत इंसानो को
इंसान बना देती है।
लगन हर मुश्किल को
आसान बना देती है।
लोग यूही नहीं जाते
मंदिरों में पूजा करने।
आस्था ही पत्थर को
भगवान बना देती है।।

रेत की जरूरत हर
मरुस्थल को होती है।
मोतियों की जरूरत हर
समुद्र को होती है।
हम लोग आप को
कभी भी नहीं भूलेंगे।
क्योंकि अच्छे दोस्त की
जरूरत हर इंसानो को होती है।।

हवा से कह दो की
खुदको आजमा के दिखाये।
बहुत चिराग बुझती हो।
कम से कम एक दो
तो जला के दिखाओ।

मिली है जिंदगी लोगों के
काम आने के लिये।
पर वक्त बीता रहा है
कागज के टुकड़े कमाने के लिए।।

आँसू को बहुत समझाया
तन्हाई में आया करों।
महफ़िल में हमारा
मजाक न उड़ाया करो।
इस पर आँसू तड़पकर बोला
इतने लोगों में तुम्हें तन्हा पाते है।
इसलिए इस भीड़ में भी
हम चले आते है।।

जय जिनेंद्र देव
संजय जैन मुंबई

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।