“राष्ट्रीय आंचलिक संस्था का स्थापना दिवस धूम धाम से मना”

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भारतीय साहित्य की अग्रहणि साहित्यिक ‘राष्ट्रीय आंचलिक साहित्य संस्था’ (रजि-HR06D0004086) की छं वी स्थापना दिवस मनाया गया! इस संस्था की स्थापना 3 जनवरी 2016 को हुई थी तब से साहित्य की ओर अग्रसर है ! दिन-दूना , रात- चौगुना सफलता की सीढ़ी चढ़ रही है ! इस संस्था की स्थापना हरियाणा के माननीय नवल पाल प्रभाकर ‘दिनकर’ जी ने किया साथ ही सम्मान की घोषणा किए ! सरस्वती वंदना बिहार के प्रख्यात लोकगीत गायक अमरेन्द्र कुमार एवं लोकगीत गायिका सरस्वती मिश्रा जी के द्वारा वंदना, गजल से कार्यक्रम की शुरुआत किया गया ! क्लासिकल डांसर महिमा शंकर एवं सौम्या शंकर जी के द्वारा भगवान शिव को आराध्य मानकर खुबसूरत अंदाज मे अपनी कला का प्रदर्शन किया गया ! इस संस्था की स्थापना से ही राष्ट्रीय महासचिव रुपेश कुमार (चैनपुर, सिवान, बिहार) जी भी कार्यरत है एवं स्थापना मे भी अपना अमूल्य योगदान दिए है ! पूरे संस्था के कार्यक्रम एवं रूपरेखा रुपेश कुमार जी के द्वारा ही किया गया ताकी चार चांद लग जाए ! एव अपने वक्तव्यो द्वारा संस्था की उचाईयों पर पहूंचाने के लिए जोड़ दिया साथ ही अपनी रचना से सबको दिल मे बसा लिया ! इनका साथ बिहार की अध्यक्ष शिक्षक/वरिष्ठ कवयित्री बबिता सिंह जी ने निस्वार्थ भाव से दिया एवं संस्था की उज्जवल भविष्य की कामना की तथा अपनी साहित्यिक रचना भी प्रस्तूत की साथ ही महाराष्ट्र की अध्यक्ष एवं पत्रकार/ख्याति प्राप्त कवयित्री निक्की शर्मा ‘रश्मि’ जी ने भी खुबसूरत शब्दों से मंच पर अपनी बात रखी एवं अपनी अतुलनीय रचनाओं से सबका मंत्र मुग्ध कर दी , राष्ट्रीय सचिव एवं सुप्रीम कोर्ट लॉ ऑफिसर एवं कवयित्री/ मंच संचालिका अनुजा ‘मनु’ जी के द्वारा पूरी कार्यक्रम की मंच संचालन बहुत खुबसूरत अंदाज मे किया गया एवं रचनाओं, तुकबंधी से सबका दिल जीत ली इतनी खुबसूरत अंदाज ! अन्तराष्ट्रीय साहित्यिक राजदूत/ संस्था संयोजक एवं अन्तरराष्ट्रीय मंच संचालिका लेखिका कवयित्री अंशु पाल ‘अमृता’ जी ने पूरी कार्यक्रम की तकनीकी व्यव्स्था की एवं शुरुआत के साथ मे शृंगार के रचनाओं से सबका मंत्रमुग्ध कर दी! इसी मे हमारी बिहार राज्य की उपाध्यक्ष पूर्व मिसेस-2019 विजेता /कवयित्री रुपा वात्सायन जी ने संस्था के निशुल्क कार्य पर अपना ध्यान केन्द्रित किया साथ ही शृंगारिक रचनाओं से दिल बाग बाग कर दी ! महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष सह वरिष्ठ पत्रकार डॉक्टर शम्भू पंवार जी के द्वारा पूरी कार्यक्रम के दौरान अपनी रचनाओं से सबका दिल जीत लिए! साथ ही बिहार की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष / आकासवाणी कवयित्री प्रायोजिका मंच संचालिका विभा राज ‘वैभवी’ जी ने अपनी लाजवाब रचनाओं से मनमोहित कर दी ! राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं गजलकार प्रिया सिंह जी द्वारा अपनी रचनाओं से मनमोह लिया साथ ही राष्ट्रीय राजभाषा अधिकारी एवं प्रोफेसर डॉक्टर विजय लक्ष्मी ‘अनु’ जी ने संस्था के काम-काज पर अपना ध्यानाकर्षित की! उत्तर प्रदेश की अध्यक्ष नीरजा विष्णु ‘नीरू’ जी के द्वारा भी खुबसूरत रचनाओं से दिल को छू लिया ! दिल्ली की अध्यक्ष एवं तकनीकी छात्रा तान्या गुप्ता जी ने अपनी रचनाओं से साहित्य के साथ तकनीकी की याद दिला दी! बंगाल इकाई से रूबी प्रसाद, वीणा चौधरी तथा बिहार इकाई से कृष्ण कुमार, पूनम यादव , वीणा, वीणा द्रिबेदी, आगरा से शैलेंद्र कुमार राणा , कैलाश सराफ , महाराष्ट्र इकाई से अरविंद सोनी ,सजय जैन ,विभा और वीना आडवाणी जी ने भी अपने काव्य पाठ से समां बाँध दिया। साथ ही बी अरुणा जी ने भी अपनी रचनाओं से समां बाधी !

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मन से भक्ति करने वाले तुम्हे प्रभु मिल जायेंगे। दानधर्म करने वालो को दौलत भी मिल जायेगी। मन से भक्ति करने वाले तुम्हें प्रभु मिल जायेंगे।। होगा ये सब सामाने तेरे तू सब कुछ यही देखेगा। प्रभु की लीला देखकर तू प्रभु चरणो में खो जायेगा। आसमान में उड़ने वालो […]

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।