संस्कार..

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shashi dube
जज्बात कभी कुछ इस तरह उभरते हैं।
करने को बयां उनको अल्फाज नहीं मिलते हैं।
जब उठती है दिल में कसक कोई
तो दिल बेकाबू हो उठते हैं।
नही मानता ये दिल किसी रस्म कोई बंधन किसी रिवाज को
बस जो है अपने मन में वही करने को मचल उठते हैं।
         किंतु थम जाती है चाहकर भी रुह न जाने किस अजनबी अहसास से
कदम बढना चाहकर भी थम जाते हैं।
जो रोक लेते हैं हमें किसी भाव मे बहने से
शायद इन्हीं को संस्कार कहते हैं।
बना देते हैं हमें आम से कुछ खास
हम अपने जीवन की इन्हें बुनियाद कहते हैं।
#शशि दुबे ‘लाड़ली’
परिचय-
नाम – शशी दुबे ‘लाड़ली’
जन्मस्थान- आगरा
शिक्षा – दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक
अनुभव  – 5 साल शिक्षिका के रूप में एक निजी संस्थान में कार्यानुभव
वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ 
साहित्य  – बचपन से साहित्य से लगाव रहा। विद्यालय एवं विश्वविद्यालय में कविता तथा वाद – विवाद प्रतियोगिता में प्रदर्शन। कविता लेखन में विशेष रूचि।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।