ज़िन्दगी

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sonu
कभी लोगों ने तड़पाया,
कभी रोगों ने तड़पाया,
कभी धनवानों ने रौंदा,
कभी नेता ने धमकाया।

कभी दिल में उठी सच बात को उसने नहीं रोका,
इन्हीं सच्चाइयों ने तो उसे बढ़ना ही सिखलाया।

वो बढ़ने फ़िर लगा आगे, किसी दीवाने के जैसे,
ये दुनिया छोड़िए अपनों
से भी पागल वो कहलाया।

ख़ुदा के रास्ते पर उम्रभर, चलता रहा, फ़िर भी,
उसी के चाहने वालों ने उसको तब भी ठुकराया।

उसे जुल्मों के आगे सिर, झुकाना जब नहीं आया,
सभी ने इक बुरे सपने की तरहा उसको बिसराया।

ख़ुदा से रोज़ दिल ही दिल में वो तो बात करता था,
ख़ुदा ने उसके दिल में फ़िर कहीं ईमान समझाया।

ख़ुदा की फ़िर इनायत ने,
उसे इक हौंसला बख़्शा,
ख़ुदा उस से यही बोले,
‘मेरे होते क्यूँ घबराया।’

सभी ने लाख़ कोशिश की, उसे भटकाने की देखो
रुकावट पार करके ,
मंज़िलों को उसने चमकाया।

उसी की ‘ज़िन्दगी’ से ,
हौंसला ‘सोनू’ को आया
उसी ने तो तमस में भी,
मुझे सूरज दिखलाया।

 #सोनू कुमार जैन

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।