कांटों भरी हैं जीवन की राहें

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कांटों भरी हैं जीवन की राहें,
आशाएं नजर ना आएं।
उलझन भरा है ये जीवन सारा,
मिले ना सुकून की बाहें ।

लेकर खंजर खड़े हैं अपने,
किस पर भरोसा जताएं।
उम्मीदें लगाएं बैठे हैं जिनसे,
वो ही हमें तड़पाएं।

मांगे कभी जो मदद किसी से,
वो राहों में कांटे बिछाएं।
अपना समझकर जो घाव दिखाएं,
वो घावों में नमक लगाएं।

सुख की घड़ी में साथ हैं सारे,
मिलकर मौज मनाएं।
वक्त बुरा जब जीवन में आए,
ना कोई साथ निभाए।

आओ खुद से संकल्प करें हम,
खुद ही अच्छे बन जाएं।
बनकर किसी के जीवन आशा,
जीने की आस जगाएं ।

अनजाने में भी ना हो पाप हमसे,
ना किसी को दर्द पहुंचाएं।
जाति धर्म के भेद मिटाकर कर,
सबको गले से लगाएं।

किस्मत के मारे,निर्धन बेचारे,
यदि हमसे आस लगाएं,
तन मन धन से उनकी मदद कर,
हम ढेरों दुआएं पाएं।

मानव हैं हम, मानवता को,
आभूषण अपना बनाएं।
बांट के सुख दुःख आपस में हम,
जीवन सुखमय बनाएं।

रचना –
सपना ( स० अ० )
प्रा० वि० उजीतीपुर
जनपद औरैया

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matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।