साहो:एक्शन,रोमांच, रहस्य का कॉम्बो पैक, कहानी कमज़ोर

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साहो
एक्शन,रोमांच, रहस्य का कॉम्बो पैक, कहानी कमज़ोर
लेखक- निर्देशक :- सुनीथ
कलाकार:- प्रभास, शृद्धा कपूर, नील नितिन मुकेश, जैकी श्रॉफ, चंकी पांडे, मंदिरा बेदी, मुरली शर्मा, टीनू आनन्द व अन्य
संगीत तनिष्क बागची,
फ़िल्म 4 भाषाओ तमिल, तेलगू, कन्नड़, मलयालम, हिंदी
तेलगू के अधिकार 125 करोड़ ₹ में बीके
तमिल भाषा मे 700 स्क्रीन्स
तेलगू में 3000
मलयालम-कन्नड़ में 800 स्क्रीन्स
पांचों भाषाओँ में 10000 स्क्रीन्स पर प्रदर्शित हो रही है जो कि अपने आप मे एक नया कीर्तिमांन है,
बजट और अनुमान
350 करोड़₹ के बजट में बनी फिल्म निसन्देह भारतीय सिनेमा की एक बड़ी महंगी फ़िल्म है,
जितने स्क्रीन्स मिले है उस अनुसार 55 से 70 करोड़ की शुरूआत मिल सकती है,
प्रस्तावना
चोरी पर हॉलीवुड, बॉलीवुड में कई फिल्में जैसे इटेलियन जॉब, ओशन 11, 12, 13, धूम सीरीज बन चुकी है पर इस फ़िल्म में नया अंदाज़ देखने को मिला,
कहानी
मुम्बई में लोकल अंडर वर्ल्ड और चोरों का गिरोह सक्रिय है, उनका सम्बन्ध वाची के माफिया लीडरों से है,,
जिसमे हैं कई अंडरवर्ल्ड माफिया है,इन सब के सामने एक और गैंगस्टर है है जो की इन सब माफिया को मार कर मुम्बई पर राज करना चाहता है, इसके लिए वह एक ब्लेक बॉक्स जिसमे तमाम गैंगस्टर की जानकारी हैं चुरा कर हासिल करना चाहता है,
इधर मुम्बई में एक दो हज़ार करोड़ की चोरी होती हैं जिसकी खबर वाची(दुबई) तक पहुचती हैं,
इधर चोरी करने वाला हीरो है, जो कि चोरी के साथ मुम्बई के लोकल माफ़िया का सफाया भी कर रहा है, उधर वाची(दुबई) में यह खबर पहुचती है कि मुम्बई में एक बड़ी रहस्यमयी तरीके से चोरी की गई हैं जिसकी खबर वाची तक गैंगस्टर माफिया तक पहुचती है अब माफिया उस चोर से वह ब्लेकबॉक्स चुरवाना चाहता है जिसमे बाकी माफिया की जानकारी हासिल करके उनका खात्मा कर अंडरवर्ल्ड किंग बन सके, माफिया हीरो की प्रेमिका जो पोलिस वाली भी है को अगवा करवा लेता है फिर शर्त ब्लेक बॉक्स लाओ प्रेमिका को ले जाओ, फ़िल्म में ट्विस्ट और टर्न्स आते हैं लेकिन कहानी नदारत लगी,
कौन शिकार है और कौन शिकारी– खैर इस जवाब के लिए आपको फ़िल्म देखनी पड़ेगी,,
वेषभूषा और मेकअप गेटअप
वेशभूषा पर भास्कर विजय ने सटीक काम हैं, हर किरदार की कॉस्ट्यूम में समझोता न करते हुवे लाजवाब काम किया गया हैं,,

कबीर शिंदे ने उपयुक्त कला का प्रदर्शन करते हुवे हर किरदार को सज़ा दिया है खासकर चंकी पांडे, मंदिरा बेदी को,,
स्पेशल इफेक्ट्स, VFX
भारत मे पहली बार हॉलीवुड की टक्कर का काम देखने को मिला क्योकि तकनीकी निर्देशक उधर से ही लिए गए थे
डेनिलो बेनेथिली, पेट ड्रेपर का काम शानदार
एक्शन
केनी बेट्स हॉलीवुड एक्शन निर्देशक के निर्देशन में कुछ दृश्यों का फिल्मांकन तो गजब का हुवा है जैसे अबुधाबी में कार चेसिंग दृश्यों में 90 गाड़ियों का इस्तेमाल के साथ 80 कैमरों से दृश्यों का फिल्मांकन हमे हॉलीवुड के सामने सीना ठोक खड़ा कर देता है,,,
संगीत
तनिष्क बागची ने एक गाना सैय्या साइको बढ़िया बनाया है
पार्श्व ध्वनि के घिबरण ने अच्छा काम किया है जो कि फ़िल्म के दृश्यों को और प्रभावी बना देता है
चार गाने हैं, चारो फ़िल्म को आगे बढ़ाने में कोई मदद नही करते, जबरन ठूंसा गया प्रतीत होता हैं,,
फिल्मांकन
आर माथि ने कुशल फिल्मांकन करते हुवे
रोमानिया, मुम्बई, दुबई के सभी दृश्यों के साथ न्याय किया, एक दृश्य में उल्टे एंगल से सीन शुरू होता है और हीरो पर पैन होकर एंगल सीधा होता है यह एक नया और विविधता भरा प्रयोग है,
सम्पादन
श्रीकर प्रसाद का सम्पादन कमज़ोर है,
केवल एक्शन दृश्यों पर ध्यान दिया गया जिससे कहानी की पकड़ छूटती लगी,,
अदाकारी
प्रभास मंजे हुवे अभिनेता है, हिंदी डब उन्होंने खुद सिख कर की है, शृद्धा कपूर जितनी सुंदर है अभिनय में उतनी ही पारंगत भी है, लेकिन भारतीय महिला पोलिस को हॉलीवुड की तरह तवज्जो नही दी जाती यही यहां भी हुवा है,,
चंकी लाजवाब काम कर गए है,,जैकी, मंदिरा, नील, महेश, मुरली शर्मा हर कलाकार ने किरदार से न्याय किया है
निष्कर्ष
फ़िल्म पूरी तरह मसाला फ़िल्म है, एक्शन, सस्पेंस, थ्रिल, रोमांस लेकिन फ़िल्म में इमोशन की कमी है जो कि खाने की थाली में कम नमक की तरह महसूस होता है, दूसरा फ़िल्म की कमज़ोर कहानी

फ़िल्म को
3 स्टार्स

समीक्षक
इदरीस खत्री

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।