खुद लिखते है

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कभी गमो का साया था
तो कभी खुशी का साया।
फर्क बस इतना था
जिस से हमने पाया ।
वो पहले गम था और
बाद में खुशी देने वाला।
वो कोई और नहीं था
हमारा ही मन था।।

डूब जाते थे तब हम
जब नहीं समझ पाते थे।
और गमो के अंधेरों में
अपने आपको पाते थे।
ये सब हमारे मन की
ही सोच होती थी।
जिसे हम और आप
उस वक्त पढ़ नहीं पाते।।

परस्थितियों से तुम
कभी मत घबराया करो।
समस्या का समाधान
तुम्हें ही खोजना है।
तभी तो सफलता
तुम्हारे कदमो को छूएगी।
और जीवन के लक्ष्य को
तुम हासिल कर पाओगें।।

बैठकर हाथ पर हाथ
हमें कुछ नहीं मिलता है।
जो भी मिलता है वो
कर्म करने से मिलता है।
इसलिए तो कर्मवीरों का आज कल बोलबाला है।
जो अपने हाथों से ही खुदकी किस्मत लिखते है।
और सच्चे योध्दा और
शूरवीर ये ही कहलाते है।।

जय जिनेन्द्र देव की
संजय जैन (मुम्बई)

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।