बंद करो दहेज़ प्रथा

सुनील वर्मा
ऐ भारत के नौजवानों,
कुछ नहीं रखा है बातों में ,
बंद करो दहेज़ प्रथा को
या खुद चूड़ी पहनो हाथों में।
बापू की वो प्यारी है,
घर में राजदुलारी है..
छोड़ के सबकुछ अपना,
वो आँगन तेरे आती है।
दुनिया में तू हूँकार भरता है,
काम लाखों के करता है..
दाता होकर फिर क्यों,
झोली ससुराल में फैलाता है।
नीयत तेरी क्यों डोल गई,
शरम तेरी  कहाँ बोल गई..
जीते जी  मरने को,
एक अबला को तूने मजबूर किया।
कहा गई मर्दानगी तेरी,
औरत पे जो जुल्म इतना ढहा रहा..
मर क्यों नहीं जाता शर्म से तू,
गर बीबी-बच्चों का पेट भर नहीं पा रहा।
पढ़ा-लिखा बेटे को तूने,
इक अच्छा इंसान बना दिया..
पर शादी में दहेज़ मांगकर,अपने काबिल बेटे को
भिखारी  बना दिया।
प्यार जितना करता है,
बेटी से अपनी..
उतना बहू से जताकर तो देख,
कितना सुख है स्वर्ग में..
अपने घर को स्वर्ग बना के तो देख।
ऐ भारत के नौजवानों…।
परिचय : सुनील विश्वकर्मा मध्यप्रदेश के छोटे गांव महुआखेड़ा (जिला गुना) के निवासी हैं। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा अपने गांव एवं बाद की इंदौर से (स्नातकोत्तर)प्राप्त की है। आप लिखने का शौक रखते हैं।वर्तमान में इंदौर में प्राइवेट नौकरी में कार्यरत हैं।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

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