गांधी जी के तीन बंदर

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गांधी तेरे तीन बंदर,नेताओ के भेष में।
लूट खसोट ये कर रहे,अब तेरे देश में।।

नही सुनते नहीं देखते,क्या हो रहा है इस देश मै।
गूंगे बहरे अंधे बने हुए है,कुछ नहीं करते देश में।।

बैठ जाते है राजघाट पर,तेरा मार्ग दिखाने को।
मुख में राम बगल में छुरी,दौड़ पड़ते है खाने को।।

अच्छा होता इन बंदरो को लेे जाते तुम अपने साथ में।
कटखने हो गए हैं ये बहुत,झोला रखते अपने साथ में।।

ले रक्खी है लाठी तेरी,जनता को इससे ये डराते हैं।
इससे भी काम न चले,फिर मार पीट भी कराते हैं।।

छीन लेते हैं गरीबों का टुकड़ा, अमीर इनके चेले होते हैं।
हर कला के ये गुरु बने हुए हैं,बुरी सीख सबको ये देते हैं।।

करो अंदर इन बन्दरों को,तभी शांति देश मै आयेगी।
वरना तेरी मूर्ति राजघाट से कहीं ओर चली जाएगी।।

आर के रस्तोगी
गुरुग्राम

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।