भला, छोड़ दूं कैसे

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पृथ्वी हूं ,
सूर्य की परिक्रमा को , भला छोड़ दूं कैसे ?
पाती हूं जीवन तुमसे, जीवन को भला छोड़ दूं कैसे ?
तेज से तुम्हारे ,बोती हूं नए ख्वाबों को
पाती हूं एहसासों की फसल को
फसल को भला छोड़ दूं कैसे ?
चलती हूं संग तुम्हारे ,कदमों को तन्हा भला छोड़ दूं कैसे ?
जीती हूं पल-पल की विविधता,ऋतुयों कीभला छोड़ दूं कैसे?
पाती हूं होली तुमसे, रंगों को भला छोड़ दूं कैसे ?
सजते हैं सुर तुमसे, वीणा के तारों को भला छोड़ दूं कैसे?
चलते हैं काफिले तुम्हारे संग
अभिव्यक्ति को भला छोड़ दूं कैसे ?
गूंजती है शहनाई तुमसे ,साज को भला छोड़ दूं कैसे? खुशबू से तुम्हारी महकता है उपवन
उपवन को भला छोड़ दूं कैसे ?
कटती है तनहाइयां तुमसे ,संवादों को भला छोड़ दूं कैसे ?
खनकती है चूड़ियां तुमसे
चमकता है सिंदूर तुमसे
महकती है मेहंदी हाथों की
माथे की बिंदिया को भला छोड़ दूं कैसे ?
थिरकते हैं अरमान दिल में
छुअन को तुम्हारी भला छोड़ दूं कैसे ?
तुम ही बताओ अब
पृथ्वी हूं
सूर्य की परिक्रमा को भला छोड़ दूँ कैसे?

#स्मिता जैन

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।