पेट न होता तो ये भूख ना होती

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पेट न होता तो ये भूख ना होती,
आंखे न होती तो ये शर्म ना होती।
अगर ये भगवान ना बनाए होते,
किसी से किसी की बात ना होती।।

आंखे न होती तो ये आंसू ना होते,
दिल न होता तो ये दर्द ना होता।
अगर ये भगवान ना बनाए होते
कोई भी किसी का आज ना होता

इंसान न होता इंसानियत ना होती
भलाई न होती तो ये बुराई ना होती
अगर दुनिया में ये कुछ ना होता
किसी से किसी की लड़ाई ना होती

तोप तलवार न होती ये लड़ाई ना होती,
एक दूसरे पर कभी चढ़ाई ना होती।
अगर ये सब कुछ दुनिया में ना होता,
सारी दुनिया अमन चैन से सोती।।

कवि न होता ये कविता ना होती,
स्टेजो पर इतनी रौनक ना होती।
अगर ये सब कुछ ना होता
साहित्य की इतनी प्रगति ना होती

चीन न होता तो कोरोना न होता
सारी दुनिया का बुरा हाल न होता
अगर ये जल्द सब खतम हो जाए
सारा विश्व प्रगति के पथ पर होता

आर के रस्तोगी
गुरुग्रामख

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जीवन

Mon Jun 22 , 2020
तृष्णा और छल-छदम् मिटाओ | प्रेमभाव अपने हृदय में जगाओ || शुष्क मन को पुष्प सा खिलाओ | राग द्वेष से सब द्वन्द भगाओ || छोटी हो या बड़ी बाधा से मत घबराओ | भर साहस हर बाधा से तुम लड़ जाओ || सदाचार अपनाकर नित आगे बढ़ते जाओ | […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।