बदला हमको लेना होगा

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surendr sinh
सुकमा में वीरों के लहू का बदला, हमको लेना होगा,
वक्त आ गया,जवाब ईंट का पत्थर से अब देना होगा।

राह से भटके नहीं हैं वो,अब बातों से नहीं मानेंगे,
जब तक उनके सीने में हम गोलियां नहीं दागेंगे।

खरपतवार से खेत भरा है,अब तो इसे जोतना होगा,
फसल उगाने नई पौध को,हमको वहां रोपना होगा।

मानवाधिकार नहीं,अब सेना का अधिकार चाहिए
आतंकी और नक्सलियों को जिंदा पकड़ के जलाइए।

दिल्ली में बैठे शासक को,यह फैसला लेना होगा,
वक्त आ गया,जवाब ईंट का पत्थर से अब देना होगा।

कब तक कफन तिरंगे का,मेरे वीरों पर डालोगे,
आस्तीन के सांपों को कब तक घर में पालोगे।

खेल-खेल में खेल रहे हैं,ये वीरों के खून की होली,
बुझा रहे हैं घर का दीपक, मिटा रहे बिंदिया रोली।

सेना के कंधों से जिस दिन, मानवाधिकार का बोझ हटेगा,
पत्थरबाज और नक्सलियों का उस दिन से अनुपात घटेगा।

न्यायमूर्ति जो बनकर बैठे,उनको यह सोचना होगा,
वक्त आ गया,जवाब ईंट का पत्थर से अब देना होगा।

                                                                      #सुरेन्द्र सिंह राजावत

परिचय : सुरेन्द्र सिंह राजावत राजस्थान के बयाना में रहते हैं। आप भारतीय सेना में कार्यरत हैं। आपको लिखने का शौक है तथा देशभक्ति पर अधिक कलम चलाते हैं,ताकि सबको देशप्रेम की प्रेरणा मिलती रहे।

matruadmin

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।