हे राम

1 0
Read Time4 Minute, 54 Second

कितने भोले हो राम तुम
सहज प्रसन्न हो जाते हो
जो भी मांगता है तुमसे
उसे वही तुम दे देते हो
अवतार रूप में आकर
हर एक का उद्धार किया
सनातन रक्षा की खातिर
रावण का संहार किया
वचन दिया जो भी आपने
उसे हर हाल में निभाया है
वचन के लिए छोड़ा राज
वनवास को गले लगाया है
जिनको दिया रामराज्य
उन्ही ने प्रश्न उठाया है
पवित्रता की देवी सीता को
अकारण वन भिजवाया है
अवतारी होकर भी तुमको
सुखचैन नही मिल पाया है
जब भी अवसर मिला जिसे
लाभ तुमसे उठाया है
इस कलियुग में देखा मैंने
नाम तुम्हारा भुनाया गया
सत्ता पाने को बार बार
नाम तुम्हारा पुकारा गया
ताले में बंद रहना पड़ा तो
तिरपाल ही आशियाना थी
भक्तो के बजाए खाकी वर्दी
आपका एक सहारा थी
भला हो राजीव गांधी का
जिसने ताले खुलवाये थे
आपके साक्षात दर्शन
आम जनता को कराये थे
मंदिर बनाने को आपका
दिलई बहुतो की इच्छा थी
कुछ के लिए आपके नाम से
कुर्सी पाने की चाहत बनी
आपके नाम की शक्ति का
कई बार चमत्कार हुआ
आपके नाम पर कई बार
कुर्सी का सपना साकार हुआ
कुर्सी पाकर हर बार वे तो
राम नाम भूल जाते थे
जब भी कोई सवाल उठता
कोर्ट का बहाना बनाते थे
जगत स्वामी को न्याय न मिले
ऐसा कैसे हो सकता था
तारीख पर तारीख चलती रहे
कब तक ऐसा हो सकता था
बिना राजनीतिक लाभ दिए
निष्पक्षता का निर्णय आया
सर्वोच्च न्यायालय के हाथों
मंदिर निर्माण का फैंसला आया
सच है राम तुम्हारी लीला
कभी कोई जान न पाया है
तुम हो भक्तो के स्वामी
भक्त ही तुम्हारी रियाया है।

श्रीगोपाल नारसन

परिचय: गोपाल नारसन की जन्मतिथि-२८ मई १९६४ हैl आपका निवास जनपद हरिद्वार(उत्तराखंड राज्य) स्थित गणेशपुर रुड़की के गीतांजलि विहार में हैl आपने कला व विधि में स्नातक के साथ ही पत्रकारिता की शिक्षा भी ली है,तो डिप्लोमा,विद्या वाचस्पति मानद सहित विद्यासागर मानद भी हासिल है। वकालत आपका व्यवसाय है और राज्य उपभोक्ता आयोग से जुड़े हुए हैंl लेखन के चलते आपकी हिन्दी में प्रकाशित पुस्तकें १२-नया विकास,चैक पोस्ट, मीडिया को फांसी दो,प्रवास और तिनका-तिनका संघर्ष आदि हैंl कुछ किताबें प्रकाशन की प्रक्रिया में हैंl सेवाकार्य में ख़ास तौर से उपभोक्ताओं को जागरूक करने के लिए २५ वर्ष से उपभोक्ता जागरूकता अभियान जारी है,जिसके तहत विभिन्न शिक्षण संस्थाओं व विधिक सेवा प्राधिकरण के शिविरों में निःशुल्क रूप से उपभोक्ता कानून की जानकारी देते हैंl आपने चरित्र निर्माण शिविरों का वर्षों तक संचालन किया है तो,पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों व अंधविश्वास के विरूद्ध लेखन के साथ-साथ साक्षरता,शिक्षा व समग्र विकास का चिंतन लेखन भी जारी हैl राज्य स्तर पर मास्टर खिलाड़ी के रुप में पैदल चाल में २००३ में स्वर्ण पदक विजेता,दौड़ में कांस्य पदक तथा नेशनल मास्टर एथलीट चैम्पियनशिप सहित नेशनल स्वीमिंग चैम्पियनशिप में भी भागीदारी रही है। श्री नारसन को सम्मान के रूप में राष्ट्रीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा डॉ.आम्बेडकर नेशनल फैलोशिप,प्रेरक व्यक्तित्व सम्मान के साथ भी विक्रमशिला हिन्दी विद्यापीठ भागलपुर(बिहार) द्वारा भारत गौरव

matruadmin

Next Post

आदरणीय राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद जी आपसे अपेक्षा की जाती है कि इसका उत्तर दिला कर कृतार्थ करें।

Fri May 8 , 2020
सम्मानणीयों सेवा में, श्री दीपक मिश्रा जी, संरक्षक राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण मुख्य न्यायाधीश भारत सरकार नई-दिल्ली। दिनांक :- 18-04-2018 । विषय :- पावर ट्रांसफर आप इंडिया एग्रीमेंट 1947 को सार्वजनिक करके एक सौ तीस करोड़ को स्पष्ट करें। माननीय दीपक मिश्रा जी, राष्ट्र परिवार भारत के वेनर तले मैं […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।