कोरों ना भगाएगे

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नहीं सोचा था ऎसा समय भी आएगा
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जनता कर्फ्यू लाएंगे
कोरों ना भगाए गे……

मीडिया के माध्यम से देश को जगाएंगे,
भारत देश की सारी आबादी बचाएंगे
कोरों ना भगाए गे..
साबुन लिक्विड से हाथ हम नहलाएंगे
निश्चित रूप से कोविड उन्नीस को हराएंगे,
कोविड उन्नीस को भगाएगे…
किसी जगह पर न हम थू के गे,
स्वच्छता का अभियान चलाएंगे
कोरों ना भगाए गे….
खांसी बुखार मे हम अस्पताल जाएंगे
कोविड उन्नीस का लेब रिपोर्ट करवाएंगे
कोविड उन्नीस भगाए गे…..
बाहर निकल ते मास्क हम लगाएंगे
अपने स्वास्थ्य को कोरों ना से बचाएंगे
कोरों ना भगाए गे….
बिना वजह हम बाजार नहीं जाएंगे
घर में ही सभी हम गीत मधु रे गाएंगे
कोरों ना भगाए गे……
अफवाहों से कभी न हम घबराएंगे
गलत अफवाहें न कभी फैलाए गे
कोरों ना भगाए गे……
मिले किसी से हाथ न मिलाए गे
मधुर स्वर में हम नमस्ते कहलाएंगे
कोरों ना भगाए गे….
भारत देश की धर्म भूमि बचाएंगे
अपने ही घर में राम धुन लगाएंगे
कोरों ना भगाए गे…..
गुलाब चंद कहे विश्व को बचाएंगे
सभी को सुंदर संदेश पहुंचाएंगे
कोरों ना भगाए गे…..

#गुलाबचन्द पटेल

परिचय : गांधी नगर निवासी गुलाबचन्द पटेल की पहचान कवि,लेखक और अनुवादक के साथ ही गुजरात में नशा मुक्ति अभियान के प्रणेता की भी है। हरि कृपा काव्य संग्रह हिन्दी और गुजराती भाषा में प्रकाशित हुआ है तो,’मौत का मुकाबला’ अनुवादित किया है। आपकी कहानियाँ अनुवादित होने के साथ ही प्रकाशन की प्रक्रिया में है। हिन्दी साहित्य सम्मेलन(प्रयाग)की ओर से हिन्दी साहित्य सम्मेलन में मुंबई,नागपुर और शिलांग में आलेख प्रस्तुत किया है। आपने शिक्षा का माध्यम मातृभाषा एवं राष्ट्रीय विकास में हिन्दी साहित्य की भूमिका विषय पर आलेख भी प्रस्तुत किया है। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय(दिल्ली)द्वारा आयोजित हिन्दी नव लेखक शिविरों में दार्जिलिंग,पुणे,केरल,हरिद्वार और हैदराबाद में हिस्सा लिया है। हिन्दी के साथ ही आपका गुजराती लेखन भी जारी है। नशा मुक्ति अभियान के लिए गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी दवारा भी आपको सम्मानित किया जा चुका है तो,गुजरात की राज्यपाल डॉ. कमला बेनीवाल ने ‘धरती रत्न’ सम्मान दिया है। गुजराती में‘चलो व्‍यसन मुक्‍त स्कूल एवं कॉलेज का निर्माण करें’ सहित व्‍यसन मुक्ति के लिए काफी लिखा है।

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।