मातृभाषा में हाइकु छंद

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. प्रथम शतक
. °°°°°°°°
१.
नीम का पेड़~
काग के घोंसलें में
पिक के चूजे
२.
फाल्गुन संध्या~
बूँटे लिए बच्चे के
पीछे कृषक
३.
नदी का घाट~
भीड़ में वृद्ध ताके
वस्त्र पोटली
४.
जल की प्याऊ~
पोटली लिए पेड़
तले बुढ़िया
५.
विवाहोत्सव~
चौपाल में वृद्ध के
सिर पे बागा
६.
नीम की छाँव~
बुढ़िया के हाथ में
रोटी चटनी

शहरी पथ ~
नग्न बाल निहारे
वस्त्रों में श्वान
८.
चाँदनी रात~
बाराती आतिश से
छान में आग
९.
छान का घर~
बया के अण्डे खाए
गिलहरियाँ
१०.
अभयारण्य~
छटपटाए मृग
बाघ सम्मुख
११.
बसंत मेघ~
ढोल के संग बजा
टीन छप्पर
१२.
गृह वाटिका~
पेड़ के राखी बाँधी
नन्ही बालिका
१३.
कार्तिक भोर~
धेनु,वत्स को दाना
खिलाए बाला
१४.
गोप अष्टमी~
सड़क पे गाय के
साथ बछड़ा
१५.
रक्षाबंधन~
कुश लिए नदी में
जल अंजुलि
१६
खजूर पेड़~
झाड़ू से तिनके को
खींचे चिड़िया
१७.
फाग पूनम~
झुलसे बाला हाथ
जौ बाली संग
१८.
गोधूलि वेला~
धागे में फँसा शुक
निहारे नभ
१९.
फाल्गुनी संध्या~
चने लिए बच्चे के
पीछे किसान
२०.
कच्ची सड़क~
ठंठा नीर पिलाए
पथी को वृद्धा
२१.
खेल मैदान~
टिटहरी के अण्डे
बाला के हाथ
२२.
गेहूँ का खेत~
कपोतों को चुग्गा दे
नन्ही बालिका
२३.
सोनार गढ़~
रेतीले धोरों पर
आँक के पौधे
२४.
पहाड़ी बस्ती~
पेड़ से गिरा ग्वाला
भेड़ों के मध्य
२५.
नदी किनारे~
घरौंदे में सीपियाँ
लिए बालक
२६.
अमलताश~
मधुमक्खी दंश से
तड़पे कपि
२७.
खेत सिंचाई~
सूखी झाड़ियों संग
दियासलाई
२८.
ग्रीष्म की साँझ~
आग लगे घर की
फोटो ली बाला
२९.
प्रथम वर्षा~
किसान के पैर पे
खून के छींटे
३०.
भादौ की वर्षा~
केले का पत्ता ओढा
नन्हा बालक
३१.
चौके में माता~
मसाला गंध संग
बाला की छींक
३२.
नीम में नीड़~
टहनी पर चढ़ी
गिलहरियाँ
३३.
वन विहार~
अग्निकाण्ड की फोटो
ले युवतियाँ
३४.
बुद्ध पूर्णिमा~
वर वधु फेरों में
स्वेद से भीगे
३५
कमल ताल~
आलिंगित भ्रमर
पकड़े युवा
३७.
सावन तीज~
झूले पे किशोरी की
उड़ी चुनरी
३८.
बसंत भोर~
बजा ढोल के संग
टीन छप्पर
३९.
बैसाख संध्या~
अन्न ढेरी के संग
भीगा कृषक
४०.
प्रथम वर्षा~
मेड़ करे वृद्ध के
संग बालिका
४१.
बुद्ध पूर्णिमा~
विवाह मंडप में
पुलिस दल
४२.
ज्येष्ठ दशमी~
फेरों में दुल्हन के
तन पे स्वेद
४३.
वर्षा का जल~
बालिका के पैरों में
चुभे कंटक
४४.
आम्र मंजरी~
फल लिए शुक पे
बाज का पंजा
४५.
फाल्गुन मेघ~
ढोल के संग बजे
पीपल पात
४६.
हवामहल~
टूटी जाली से कूदा
कपि युगल
४७.
गृह वाटिका~
पेड़ के राखी बाँधी
नन्ही बालिका
४८.
गोप अष्टमी~
ग्वाल का घर ताके
गाय बछड़ा
४९.
गोप अष्टमी~
बछड़े के मुख में
प्लास्टिक थैली
५०.
आम बागान~
वर्षा में वानर नोंचे
बया का नीड़
५१.
ताजमहल~
वृद्धा बेचे तस्वीर
अशोक तले
५२.
बच्छ द्वादशी ~
कार की टक्कर से
तड़पे गाय
५३.
सावन तीज~
झूले पे किशोरी की
गोद मे शिशु
५४.
प्रेम दिवस~
छात्र-छात्रा के शव
रेल पथ पे
५५
बँधा युवक
ग्राम्य चौपाल पर~
नँगाड़ा गूँज
५६.
बैसाख साँझ~
कैरी जीरा चटनी
मिस्सी रोटी पे
५७.
नीम की डाल~
बल खाए कोबरा
चील पंजे में
५८.
तिमनगढ़~
सैलानी के हाथ में
चमगादड़
५९.
फाग पूर्णिमा~
मेंहदी रचे हाथों
में बलूकड़ी
६०.
चैत्र की भोर~
हरियल मुख में
पीपल फल
६१.
होली दहन~
रक्त सने हाथ में
जौं की बालियाँ
६२.
बंजर भूमि~
श्वान को चोंच मारे
टिटहरियाँ
६३.
विद्युत पोल~
मृत कपि को घेरे
बाल समूह
६४.
भोर का तारा~
घुटने मध्य बाल्टी
में दुग्ध धार
६५.
कमल ताल~
आलिंगित भ्रमर
पत्तियों पर
६६.
गोचर भूमि~
टिटहरी के अण्डे
ग्वाल हस्त में
६७.
रामनवमी~
वृद्ध भीगा गेहूँ के
खलिहान में
६८.
फाग के मेघ~
पंछी शव खेत में
बर्फ की पर्त
६९.
फाग फुहार~
पसरी फसल में
लोमड़ी शव
७०.
भादौ का ताप~
चूहा दाबे सर्प को
मोर निँगले
७१.
तालछापर~
घर में रोटी खाए,
काला हरिण
७२.
चमगादड़~
माँ की आँखो से नीर
पौंछे बिटिया
७३.
माघ पूर्णिमा~
वेणेश्वर मेले में
अस्थि थैलियाँ
७४.
बेटी दिवस~
झाड़ियों में शिशु के
मुख अंगूठा
७५.
माँ की ममता~
नीम पे मर्कटी की
गोद में पिल्ला
७६.
पद्मला ताल~
बाघिन के मुख में
झूला मकर
७७.
जोगी महल~
जड़ी बूटियों संग
बाघ का नख
७८.
गोरस धार~
हाथ में थन बाल्टी
घुटनों मध्य
७९.
चूरमा बाटी~
कण्डे की आग पर
आटे की पिण्डी
८०.
चाँदनी रात~
पीठ पे बकरी को
लदे जरख
८१.
चैत्र मध्यान्ह~
नीम डाल पे तोते
चोंच लड़ाए
८२.
देवशयनी~
विवाह मंडप में
थाली में भेक
(भेक=मेढ़क)
८३.
अक्षय तीज~
विवाह मंडप में
हथकड़ियाँ
८४.
सावन वर्षा~
बया नीड़ का टोपा
पहने शिशु
८५.
मिट्टी का चूल्हा~
माँ के हाथ रोटी पे
आलू चटनी
८६.
पुष्कर मेला~
बाजरे की रोटी में
सींगर कढ़ी
८७.
दादुर ध्वनि~
छप्पर पर वृद्ध
के हाथ रस्सी
८८.
अमा की रात~
बया के घोंसले में
मिट्टी चमकी
८९.
भादौ के मेघ~
चींटियों के अण्डों को
चुगे तीतर
९०.
बैसाख भोर~
पत्तों पर अंजीर
रखे बालक
९१
ज्येष्ठ की ताप~
मतीरे की क्यारी में
सत्तू शक्कर
९२.
चंद्र ग्रहण~
काँसे की थाली पर
गेरुआ छींटे
९३.
आसोज साँझ~
टिड्डे लपके स्वान
राजपथ पे
९४.
फाग में ओले ~
बिखरे पंख संग
पथ पे रूई
९५.
शीत लहर~
वृद्धा हाथ मे हरे
चने माचिस
९६.
प्रेम दिवस~
वृद्धाश्रम के द्वार
बैठे माँ बाप
९७.
रास पूर्णिमा~
खीर का दोना थामें
खाँसे बुजुर्ग
९८.
कार्तिक साँझ-
चौक लीपे बाला के
पीठ पे शिशु
९९.
कसैलापन-
माँ हस्त शीशी देख
शिशु की चीख
१००.
ठूँठ झंखाड़-
चिड़िया के नीड़ में
अण्डे छिलके

नाम–बाबू लाल शर्मा 
साहित्यिक उपनाम- बौहरा
जन्म स्थान – सिकन्दरा, दौसा(राज.)
वर्तमान पता- सिकन्दरा, दौसा (राज.)
राज्य- राजस्थान
शिक्षा-M.A, B.ED.
कार्यक्षेत्र- व.अध्यापक,राजकीय सेवा
सामाजिक क्षेत्र- बेटी बचाओ ..बेटी पढाओ अभियान,सामाजिक सुधार
लेखन विधा -कविता, कहानी,उपन्यास,दोहे
सम्मान-शिक्षा एवं साक्षरता के क्षेत्र मे पुरस्कृत
अन्य उपलब्धियाँ- स्वैच्छिक.. बेटी बचाओ.. बेटी पढाओ अभियान
लेखन का उद्देश्य-विद्यार्थी-बेटियों के हितार्थ,हिन्दी सेवा एवं स्वान्तः सुखायः 00

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।