प्रार्थना-पत्र 15

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सेवा में,
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी,
दिनांक: 18 फरवरी 2020
विषय: नागरिकता संशोधन कानून CAA के पक्ष में पदयात्रा की समय रहते तुरंत अनुमति हेतु आवेदन-पत्र।

आदरणीय महोदय
जय हिंद!
माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी आप व सशक्त गृहमंत्री अमित शाह जी के कड़े आदेश पर 15 फरवरी 2020 को सी.आई.डी. द्वारा मेरी सम्पूर्ण जांच हुई।जिसमें मैंने अपनी जन्म तिथि से लेकर जन्म स्थान मनावर तक का ब्यौरा दिया।उसमें मैंने बाल्यास्था और युवास्था में किए गए सफाई अभियानों के लिए राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग दिल्ली एवं माननीय जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय तक के संघर्ष का उल्लेख किया है।इसके अलावा अपनी पढ़ाई,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, एन.सी.सी के बी प्रमाण-पत्र,भाजपा गोवा मुक्ति स्वतंत्रता सैनानी एवं पूर्व विधायक स्वर्गीय ठाकुर सहदेव सिंह जी के नेतृत्व में सामाजिक कार्य करने की रूपरेखा बताई।यह भी बताया कि कैसे पूर्व विधायक स्वर्गीय ठाकुर रामनाथ मन्हास जी के संग मैंने हीरानगर जेल काटी थी।बड़े-बड़े नेताओं के संग सेंटर जेल जम्मू का भी उल्लेख किया।एस.एस.बी. से पहले रियल एनालाईजिज विंग में भी राष्ट्रसेवा के लिए चयनित हुआ था।मगर एस.एस.बी में पहले बुलावा आने पर उसे ही कर्मक्षेत्र मानते हुए 05 दिसंबर 1990 में गृह मंत्रालय के वृत संगठन कार्यालय ज्यौड़ियां में नियुक्ति पाई।जहां मैंने तीन वर्ष सकुशल सेवा की थी।किंतु भ्रष्टाचार के विरोधी होने के कारण मुझे पक्का नहीं किया गया था।मगर जैसे ही वृत अधिकारी प्रदीप गुप्ता आया और उसकी घूस लेने की मानसिक प्रावृति का शिकार हो गया।जिसके विरोध के कारण मुझे पागल खाने पहुंच दिया गया।सब कुछ तथ्यों सहित बताया।कैसे छुट्टी पर होने के बावजूद मुझे लेह-लदाख जैसे दुर्गम क्षेत्र में स्थानांतरण किया, वहां से सेना के मेड़ीकल बोर्ड के दिशा निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए अस्सिटेंट डायरैक्टर कर्ण सिंह ने राजौरी के थानामंड़ी में,थानामंड़ी से राकेश कुमार द्वारा थप्पड़ मारना,रिवाल्वर से जानसे मारने के लिए धमकाना, एल.आर.शर्मा व बी.के. आनंद ने कैसे मुझे पीड़ित-प्रताड़ित कर देशद्रोही के कलंकित आरोप से बिना वेतन के राजस्थान स्थानांतरण कर दिया था।जहां से गुजरात भेज दिया था।माननीय जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में याचिका के लिए कांग्रेसी नेता एवं अधिवक्ता आशोक कुमार शर्मा ने मुझसे पांच हजार रुपये लेने के बावजूद मेरे क्रूर अधिकारियों से मिलीभक्त व उनसे धन के कारण मेरी याचिक दाखिल नहीं की थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी सब बता दिया है।यह भी बता दिया की एस.एस.बी के कांग्रेस नीत भ्रष्ट क्रूर अधिकारी बार-बार कैसे-कैसे प्रताड़ित करते थे।बता दिया कि कैसे मैंने न्याय पाने के लिए किए संघर्ष के अंतर्गत गुजरात के जामनगर में सेंटर जेल काटी थी।मगर न्याय न मिलने के कारण और देसराज अधिकारी द्वारा जान से मार डालने,तपेदिक के होते हुए भी षडयंत्र के अंतर्गत मैस से खाना ना खाने देना इत्यादि के कारण अपने घर ज्यौड़ियां भाग आया।जहां मैंने बिमारी की अवस्था में ही अपनी धर्मपत्नी की अध्यक्षता में घर-घर सुलभ शौचालय बनवाए और रेडक्रास के 85 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिलवाया।जिसके प्रमाण-पत्र आज भी भ्रष्ट दिनेश गुप्ता के कारण ना मिलने पर भारत कैसे विश्व कीर्तिमान से वंचित रह गया भी बताया।माननीय उच्च न्यायालय के घूसखोर न्यायधीशों के झूठे निर्णय भी बताए।पुंछ में मेरे न्याय संघर्ष के दौरान मेरी बीवी पर किए हमलों के बारे में भी बताया।इस बात का भी उल्लेख किया कि कैसे राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय के भ्रष्ट डाक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर मुझे नौकरी से निकाल देने के बाद, मैंने कैसे-कैसे मांग कर खाना खाया और फिर समाचार-पत्र बेच कर अपना व अपने परिवार का भरण-पोषण किया और 2010 को विभाग ने उच्च न्यायालय के फुल बैंच द्वारा कानून के अनुसार कार्यवाही करने के आदेश के बावजूद एवं विकलांगलता न्यायालय में एम्स के डाक्टरों के प्रमाण-पत्र के बावजूद मुझे पागल की ही पेंशन दी जा रही है।यह भी बताया कि आज भी मेरे एसएसबी विभाग के आदरणीय डायरेक्टर जनरल कुमार राजेश चन्द्रा आईपीएस मेरे मन की बात भी नहीं सुन रहे।यह भी बता दिया कि मेरी राष्ट्रभक्ति से मेरी बीवी-बच्चों को क्या-क्या कष्ट झेलने पड़े हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी निरंतर उन्हीं असहनीय कष्टों के कारण आज मेरा परिवार बिखर चुका है।अब मेरा पूर्व अनुभव है कि जब-जब मैंने न्याय मांगा मेरे शत्रुओं ने मेरी बीवी पर हमले किए।इसलिए माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी इससे पहले की कांग्रेस सहित मेरे ऊपरोक्त शत्रु मेरे से अलग जीवन बसर कर रहे मेरे बीवी बच्चों को हानि पहुंचाएं। उससे पहले एकला चलो रे के आधार पर मुझे पदयात्रा की अनुमति देकर कृतार्थ करें।ताकि सम्पूर्ण न्याय की इच्छा त्याग कर मैं सम्पूर्ण राष्ट्रीय कर्त्तव्य पालन करते हुए उक्त स्वार्थी समाज व अपने नारकीय कलंकित जीवन से सम्पूर्ण मुक्ति पा सकुं।सम्माननीयों जय हिंद

प्रतिलिपि सेवा में:- (1) माननीय सांसद डा.जितेंद्र सिंह जी, शमशेर सिंह मन्हास जी एवं जुगल शर्मा सहित
(2) माननीय,डिव काम जम्मू, डीसी जम्मू और एसडीएम अखनूर व एसडीएम खौड़ एवं कई अन्यों को सूचना एवं शीघ्र उचित कार्यवाही हेतु अणुडाक अर्थात इमेल द्वारा सादर भेज दी हैं।सम्माननीयों जय हिंद

प्रार्थी
इन्दु भूषण बाली
आरएसएस के स्वयंसेवक, पत्रकार, चिंतक, आलोचक, हिंदी+अंगरेज़ी+डोगरी लेखक, विचारक, शोधकर्ता एवं भारत के राष्ट्रपति पद का पूर्व प्रत्याशी समीप महावीर मंदिर खौड़ कैंप,
डाकघर व तहसील:- खौड़
जिला:- जम्मू
प्रदेश जम्मू व कश्मीर

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।