वतन की शान वाला…

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pradeepmani
की ख़यालों में उजाला है वतन की शान वाला है,
हुकूमत के गुरों की बंदगी आज़ान वाला है।
नसीहत दे रहा है वो नसीहत को निभाएगा,
कहे दुनिया भरोसे का अज़ी एहसान वाला है।
मनाता है नहीं वो ज़श्न दिलों को जोड़ता है वो,
कभी लंदन कभी यूरोप जाता मान वाला है।
सुनो बस आरज़ू इतनी वतन उसका शिखर पे हो,
ज़मीं से आसमाँ तक रात दिन की तान वाला है।
गुमाँ पाले ख़यालों में समंदर मापता है वो ,
बना दे गैर को अपना अज़ी पहचान वाला है।
हमारे सामने आया वतन का वो मुसाफ़िर है,
सिकंदर सा रखे वो हौंसला सम्मान वाला है।
कभी दरिया खँगाले वो जुटाकर सीप है लाता,
कहें नायाब किस्सा आज जीवनदान वाला है।
लक़ीरें खींचता लंबी नई वो राह लाता है,
हिमालय की तरह वो तो खड़ा आसान वाला है।
हिमाक़त देखकर उसकी हिला है आज अमेरिका,
बना है लौह की दीवार हिन्दोस्तान वाला है ।
न जाने लोग कैसे हैं खयालों में न गहराई,
उन्हें कहते सुना है मौत की सामान वाला है।
सुना कुछ पेट में है टीस उसका नाम दुनिया में,
इसी से हायतौबा है मची ईमान वाला है ।
कराहें चीख आती ‘ध्रुव’ क़बीलों से महल से भी,
रुके कैसे भला इक पल वतन की आन वाला है।
                                                      #प्रदीपमणि तिवारी ‘ध्रुवभोपाली’
परिचय:भोपाल निवासी प्रदीपमणि तिवारी लेखन क्षेत्र में ‘ध्रुवभोपाली’ के नाम से पहचाने जाते हैं। वैसे आप मूल निवासी-चुरहट(जिला सीधी,म.प्र.) के हैं,पर वर्तमान में कोलार सिंचाई कालोनी,लिंक रोड क्र.3 पर बसे हुए हैं।आपकी शिक्षा कला स्नातक है तथा आजीविका के तौर पर मध्यप्रदेश राज्य मंत्रालय(सचिवालय) में कार्यरत हैं। गद्य व पद्य में समान अधिकार से लेखन दक्षता है तो अनेक पत्र-पत्रिकाओं में समय-समय पर प्रकाशित होते हैं। साथ ही आकाशवाणी/दूरदर्शन के अनुबंधित कलाकार हैं,तथा रचनाओं का नियमित प्रसारण होता है। अब तक चार पुस्तकें जयपुर से प्रकाशित(आदिवासी सभ्यता पर एक,बाल साहित्य/(अध्ययन व परीक्षा पर तीन) हो गई है। 
यात्रा एवं सम्मान देखें तो,अनेक साहित्यिक यात्रा देश भर में की हैं।विभिन्न अंतरराज्यीय संस्थाओं ने आपको सम्मानित किया है। इसके अतिरिक्त इंडो नेपाल साहित्यकार सम्मेलन खटीमा में भागीदारी,दसवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में भी भागीदारी की है। आप मध्यप्रदेश में कई साहित्यिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं।साहित्य-कला के लिए अनेक संस्थाओं द्वारा अभिनंदन किया गया है।

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संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।