विश्व पुस्तक मेले में ‘वारांगना’ का विमोचन सम्पन्न

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इंदौर ।

हिंदी लेखक व मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.अर्पण जैन अविचल की पुस्तक ‘वारांगना-व्यथांजलि’ का विमोचन दिल्ली पुस्तक मेले में 11 जनवरी को लेखक मंच पर डॉ.वेदप्रताप वैदिक,पद्मश्री डॉ सुरेंद्र शर्मा,डॉ कुँवर बैचैन, डॉ दिविक रमेश, डॉ दिवाकर शुक्ल, स्वामी विदेह देव जी, प्रो राजीव शर्मा, संतोष शुक्ला जी की उपस्थिति में हुआ।
संस्मय प्रकाशन से प्रकाशित व्यथांजलि,अनूठे विषय वारांगना पर लिखी काव्य धारा है, जिसमें लेखक ने एक वैश्या की मनोस्थिति और उसकी पीड़ा को लिखा है। इस पुस्तक में काव्य रुप में उस व्यथा को व्यक्त किया है। इस पुस्तक का आवरण चित्र इंदौर की ख्यात चित्रकार रचना शर्मा जोशी ने बनाया है। अब तक डॉ जैन की 6 किताबें आ चुकी है, यह सातवीं किताब पाठकों के बीच है।
पुस्तक के विमोचन पर संस्मय प्रकाशन की निदेशिका शिखा जैन, मातृभाषा उन्नयन संस्थान की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ.नीना जोशी, राष्ट्रीय महासचिव कमलेश कमल, राष्ट्रीय सचिव गणतंत्र ओजस्वी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अंजलि वैद, दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष रिंकल शर्मा, हिंदी योद्धा जलज व्यास आदि ने डॉ. जैन को बधाईयाँ दी ।

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Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।