आवारागर्द आदमी और औरतें

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आदमी  और औरतें
सारी सीमाऐं लांघ जाते है,
अपने-अपने आवारागर्द ख्यालो में,
औरतें अपने पतियों का हाथ छुड़ा
ढूंढना चाहती है कुछ आजाद पल
और साथ ही जो पति में नहीं दिखा कभी
उस प्रेमी की बाहों में सिमटने को
लालायित हो जाती है,
आदमी अपने जीवन की एकरसता से उक्ताकर
कुछ नया पाना चाहते है
नयेपन की परिभाषा में फिर भी ना उलझ कर
वो बस किसी और के हाथ के साथ
किसी शाम नया चाँद देखना चाहते है,
अपने-अपने ख्यालो में,
और फिर बंध जाते है अपनी-अपनी
जिम्मेवारियो की जंजीरो में, लेकिन
इन आदमीयो और औरतो में से
कुछ लांघ जाते है देहरी, छिपकर
और राज छिपा जाते है
बाकि की दुनिया सारी से
और कुछ ऐसे भी जो बिना डरे ही
सभी वर्जनाऐं तोड़ देते है
सभ्य समाज की,
बदचलन कहलाते है,
आदमी और औरते
जो ख्यालो में आवारागर्दी करते है, या
सफेदपोश अय्याश होते है
या बदचलन कहलाने का दम रखते है
तीनो ही जैसे समानार्थक शब्द बन जाते है,
आवारागर्द आदमी और औरतें…..

                   #हरदीप सबरवाल.

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।