‘घाटी का दर्द’

Read Time0Seconds

pavan kumar

क्रंदन मन आँ खों के आँसू ,
कैसे भला छिपाऊँ मैं।
रोती घाटी चीख रही है,
कैसे चुप हो जाऊँ मैं।।

अपने घर के गद्दारों ने,
इसको घायल कर डाला।
आतंकी हमलों ने इसका,
खूनी आँचल कर डाला।।

सत्ता की चाहत में नेता,
कैसे चुप हो जाते हैं।
राजनीति के चक्कर में,
क्यों सैनिक लातें खाते हैं।।

शर्मसार है पूरी घाटी,
आतंकी अफसानों से।
राजनीति क्यों खेल रही है,
सरहद खड़े जवानों से।।

ममता का मन्दिर घायल है,
कैसे इसे बचाऊँ मैं।
रोती घाटी चीख रही है,
कैसे चुप हो जाऊँ मैं।।

ऐसे छूट मिली गर इनको,
ये आगे बढ़ जाएंगें।
भारत माता की छाती पर,
ये आतंक मचाएंगें।।

पहले निपटो घर के अंदर,
छिपे हुए गद्दारों से।।
तब जाकर के निपट सकोगे,
आतंकी सरदारों से।।

सेना का अपमान करे जो,
उसको फाँसी लटका दो।
जो भी मारे उसको मारो,
खुली छूट सेना को दो।।

दहक रही है पावन धरती,
छाले किसे दिखाऊँ मैं।
रोती घाटी चीख रही है,
कैसे चुप हो जाऊँ मैं।।

                                                                              #पवन कुमार यादव

परिचय :  पवन कुमार का जन्म 1991 में हुआ है और आप पिता के साथ कृषि करते हैं। शिक्षा में स्नातक हैं तथा नौकरीपेशा हैं। लेखन आपका शौक है,समय मिलने पर रचनाकार बन जाते हैं। साहित्य में रुचि रखते हैं।

0 0

matruadmin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

रिश्ते हो गए पत्थर

Thu Apr 20 , 2017
नज़र की क्या कहें अब तो ज़िगर भी हो गए पत्थर। कहाँ बू-ऐ-वफा खोई कि रिश्ते हो गए पत्थर।। खुदा भी बेबसी में शब-सहर रोया यकीनन है। दरख्तों पे खिले कुछ फूल भी जब हो गए पत्थर।। बड़ी उम्मीद लेकर मैं चली आई सुनो प्यारे। मगर थी क्या खबर जज्बात […]

Founder and CEO

Dr. Arpan Jain

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।