बडी़ उम्र का प्यार

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बड़ा साधारण सा व्यवहार होता है..
जो यह बड़ी उम्र का प्यार होता है..
उन की झुर्रियां भी प्यारी लगती है..
उनकी बातें सारी न्यारी लगती है..
आंखों में आकर्षण बेशुमार होता है..
जो यह बड़ी उम्र का प्यार होता है..
उनके कानों पर रंगे कुछ सफेद बाल..
उनके सुलझे हुए बेरंग कुछ सवाल..
उनके कांधे पे सर रखके सो जाना..
उनसे लिपट करके कभी रो जाना..
उनकी चाहत में तजुर्बा बेशुमार होता है..
जो यह बड़ी उम्र का प्यार होता है..
उनके चेहरे का कशिश भरा सांवला रंग..
उनकी बातों में कुछ पाने का उतावलापन..
उनकी रंगी जुल्फों से उतरा हल्का रंग..
सच में सब गजब का श्रृंगार होता है..
जो यह बड़ी उम्र का प्यार होता है..
वो ईशारों में सब कुछ कह जाते हैं..
वो चुपके से कई बार मुझको छू जाते हैं..
उनके अधरों पर ठहरे अनगिनत सवाल..
उनके गले पर पसीने से चिपके दो बाल..
हाय कयामत उनका हर अंदाज होता है..
यह जो बड़ी उम्र का प्यार होता है..

#सचिन राणा हीरो

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।