ज़ख्म_है_तो_लाज़मी_है_दर्द_होना 

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asprindar deji
#ज़ख्म_है_तो_लाज़मी_है_दर्द_होना
बेशक़ दिखते नहीँ..
#दर्दे जिग़र पे एहसासों की परत जो लगी है
यादेँ हैँ तो लाज़मी है अश्कों से धोना
 सूख जाते हैँ कुछ नासूर_ए_ज़ख्म
  बस चंद बूँदों से धोने पड़ते हैँ
    रिसते रहते हैँ ….कतारों में
वो #दर्द जो लम्हों में ठहरे रहते हैँ
ज़िस्मों_जाँ है तो लाज़मी है चाहत होना
बेशक़ बेसबब बेहितेँहा
निगाहोँ में कशिश_ए_रूप की परत जो चढ़ी है
रूह से है तो लाज़मी है पाकीजा होना
   आह बन कर टपकते हैँ पलकों से
    लबों से ज़ाम ए हंसी पीते हैँ
    आँखो में रहते हैँ #दर्द ..ग़ज़ल बन
   वो ज़ख्म जो रूह में उतर जाते हैँ ….
#ज़ख्म_है_तो_लाज़मी_है_दर्द_होना**
  #कभी_ये_दर्द_जीने_की_वज़ह_बन_जाते_हैँ #
#असपिंदर कौर बेदी 
परिचय
पूर्ण नाम: -असपिंदर कौर बेदी 
साहित्यिक उपनाम: -डेज़ी बेदी जूनेज 
शहर -मोहाली (चंडीगढ़)
राज्य —- पंजाब 

matruadmin

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।