जिंदगी यही तो है…

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sunil goyal

जिंदगी यही तो है…
कुछ पूरी कुछ अधूरी…
परिवार साथ है तो पूरी…
और दूर, तो अधूरी…
एक ऐसी प्यास जो ना बुझती कभी…
ऐसी भूख जो ना लगती कभी…
एक अहसास है…
कुछ पाने का कुछ खोने का…
यही तो है जिंदगी…
कुछ पूरी कुछ अधूरी।

सांसें नहीं है जिंदगी…
जिंदगी वो उमंग है,
जो उम्मीदों के घर में रहती है…
कुछ टूटे सपने, कुछ छूटे अपने…
कुछ बनती बातें, कुछ बिगड़ी बातें…
कभी तन्हा, तो कभी शोर…
ये जिंदगी ही तो है…
कुछ पूरी कुछ अधूरी।

ठहरती नहीं बस…
भागती ही है…
तभी तो खास है…
ना परवाह किसी की, कौन साथ है…
ना परवाह कौन जुदा है…
बस चलती है अपनी ही धुन में…
ना रूकती किसी के लिए…
सोचो तो कुछ भी नहीं…
और सोचो तो सब कुछ…
कुछ पाने की उम्मीद है…
कुछ खोने का डर…
जिंदगी ही तो है…
कुछ पूरी कुछ अधूरी।

बड़ी खवाहिश भी है…
छोटी मुस्कान भी है…
कुछ प्यार है…
कुछ दर्द भी…
कुछ विश्वास है, कुछ धोखा भी है…
कभी मर्जी से चले हमारी कभी खुद की…
जिंदगी यही तो है…
कुछ पूरी कुछ अधूरी।

कभी सब चाहिए…
कभी कुछ भी नहीं…
कभी रूकना ही नहीं…
कभी चलना ही नहीं…
कभी रास्ते खुलें
कभी सब बंद..
क्या क्या करवाती है…
और करवाती कुछ भी नहीं…
यही तो है जिंदगी…
कुछ पूरी कुछ अधूरी।

#सीए सुनील गोयल
भिवानी(हरियाणा)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।