बिहार में मौत का तांडव

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aashutosh kumar
चमकी बुखार का कहर
प्रकृति का भी असर
तपती धरती बढ़ती गर्मी
झूलसते लोग दवा वेअसर।
सैकडो मासूमो को, कर रहा शिकार
वेवस और लाचार, बन रही है सरकार।
कई जिलों में धारा 144 लागू
फिर भी नही मौत पर काबू।
ऐ चमकी
लीची से क्यों इतना प्यार हुआ
तेरे प्यार को न समझ पाये मासूम
व्यापारी लीची कहर बनी बच्चो पर
दो चार खाते ही चमकी बुखार आये
सो गये आगोश में इतने सारे
फिर भी चमकी तुझे चैन न आये।
बूझ रहे है चिराग साल दर साल
सबक क्यों न लेती राज्य की सरकार
मौत का तांडव मचा रहा लू और बुखार
प्रकृति के आगे सब है लाचार।
बदइन्तजामी की भयावह
और विक्राल है तस्वीर
एक बेड पर तीन-तीन बच्चे
अस्पताल की बनी है तकदीर।
उपचार को तरसते बच्चे
माताओ को विलखते देख
ह्रदय विदारक आँसूओ में
डूब रहा बिहार का होनहार।
हर तरफ दुआओ का दौर
बुखारो से डर का माहौल
लाचारी का यह मंजर
माताओ के सीने पर चले जैसे खंजर।
सूनी सड़के सूनी खेत
मनरेगा कर्मियो से न हो भेंट
इस सितम का एक इलाज
बरखा रानी जल्दी आओ बिहार।।
                                आशुतोष
                              पटना बिहार
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।