बिहार में मौत का तांडव

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aashutosh kumar
चमकी बुखार का कहर
प्रकृति का भी असर
तपती धरती बढ़ती गर्मी
झूलसते लोग दवा वेअसर।
सैकडो मासूमो को, कर रहा शिकार
वेवस और लाचार, बन रही है सरकार।
कई जिलों में धारा 144 लागू
फिर भी नही मौत पर काबू।
ऐ चमकी
लीची से क्यों इतना प्यार हुआ
तेरे प्यार को न समझ पाये मासूम
व्यापारी लीची कहर बनी बच्चो पर
दो चार खाते ही चमकी बुखार आये
सो गये आगोश में इतने सारे
फिर भी चमकी तुझे चैन न आये।
बूझ रहे है चिराग साल दर साल
सबक क्यों न लेती राज्य की सरकार
मौत का तांडव मचा रहा लू और बुखार
प्रकृति के आगे सब है लाचार।
बदइन्तजामी की भयावह
और विक्राल है तस्वीर
एक बेड पर तीन-तीन बच्चे
अस्पताल की बनी है तकदीर।
उपचार को तरसते बच्चे
माताओ को विलखते देख
ह्रदय विदारक आँसूओ में
डूब रहा बिहार का होनहार।
हर तरफ दुआओ का दौर
बुखारो से डर का माहौल
लाचारी का यह मंजर
माताओ के सीने पर चले जैसे खंजर।
सूनी सड़के सूनी खेत
मनरेगा कर्मियो से न हो भेंट
इस सितम का एक इलाज
बरखा रानी जल्दी आओ बिहार।।
                                आशुतोष
                              पटना बिहार

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।