विचारों में नेकता देश में एकता

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saket jain

पहला मित्र – क्या हम सब एक हैं ?

दूसरा मित्र – नहीं, नहीं हम एक कैसे हो सकते हैं मैं हिन्दू, तुम मुसल्मान, ये सिक्ख, ये ईसाई ; हम सभी अलग-अलग धर्मों को मानने वाले  हैं, इसलिए हम एक नहीं हो सकते हैं ।

तीसरा मित्र – अरे, अरे ! झगड़ते क्यों हो ; हम एक हैं भी और नहीं भी ।

पहला मित्र – वह कैसे ?

तीसरा मित्र – वह ऐसे कि हम सब मनुष्य हैं इसलिए एक हैं, यदि हम एक विचारधारा वाले हो जाएं तो भी हम एक कहलाएंगे फिर वह विचारधारा कैसी ही क्यों न हो ।

हां लेकिन एक बात जरूर है …… और वो ये कि यदि हम गलत विचारधारा से एक हैं तो हमारी यह एकता ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं है क्योंकि खोटे परिणाम आपस में ही एक दूसरे को काटते हैं जैसे बहुत क्रोध आ रहा हो जिसे, ऐसा दुकानदार भी लोभ परिणाम के चलते उस क्रोध परिणाम को निगल जाता है । अतः यदि हम अच्छी विचारधारा के साथ अपनी एकता को स्थापित करेंगे तो वह लम्बे काल तक सुदृढ़ और मजबूती के साथ सदा ही बनी रहेगी ।

दूसरा मित्र – और हम अलग कैसे ?

तीसरा मित्र – अरे ! जब हमारी विचारधाराएँ आपस में नहीं मिलती तब हम एक न होकर के अलग-अलग हो जाते हैं यही कारण तो है कि इतने विवाद, झगड़े इत्यादि होते रहते हैं ।

इसलिए हम सभी को आज से अपितु अभी से ही अच्छी विचारधारा वाले लोगों के साथ एकता स्थापित करनी चाहिए तभी सभी लोगों का विकास होगा, समाज उन्नति करेगा और देश पुनः एक विश्व गुरु के रूप में सारे जहाँ में स्थापित होगा ।

साकेत जैन शास्त्री ‘सहज’
जयपुर(राजस्थान)

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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।