शिक्षक दिवस के अवसर पर इस दुनिया में मुझे जितने भी लोगों से छोटी से छोटी कोई भी बात सीखने का अवसर मिला, उन सभी गुरुओं को मेरी तरफ से समर्पित है मेरी एक छोटी सी कविता – मैं गुरुओं की महिमा गाँऊँ, उनके उपकार को बतलाऊँ । किन शब्दों […]

आज श्रुत पंचमी के पावन अवसर पर एक रचना, जो कि सुनील भैया जी शिवपुरी वाले की कथाओं के तर्ज पर आधारित है सादर प्रेषित है । जिनशासन की गौरवगाथा आज बताते हैं । श्रुत पंचमी पर्व की मंगल कथा सुनाते हैं ।। सुनो जी जैनधर्म इतिहास । यासों होवे […]

हम सबमें जज़्बात होते हैं……… हम सबके जज़्बात होते हैं…….. ………. होने भी चाहिए क्योंकि यदि जज़्बात न हों तो फिर मानव और मशीन में फर्क ही नहीं रह जायेगा इसलिए जज़्बातों का होना तो बनता है, स्वाभाविक भी है । हां पर हमें जज़्बातों में ज़्यादा बहना नहीं चाहिए […]

कागज की नाव को पानी की ऊपरी सतह पर उतारना आसान होता है । पर उस कश्ती को नदिया पार ले जाना कठिन काम होता है । उस कागज की कश्ती को बनाना भी कोई आसान काम नहीं, पर सीखने में बस थोड़ा ध्यान लगाना होता है । और शायद […]

आज सुबह-सुबह एक घटना घट गयी बड़ी, गर्म करने रखे दूध की रबड़ी बन गयी । हुआ यूं कि सुबह के समय मैं क्लास में बैठा था, जहाँ बढ़ रही प्यास ने मुझे चारों ओर से ऐंठा था । अब बढ़ती हुयी प्यास, अंदर से इतनी बढ़ गयी थी कि […]

आज पानी के न आने से परेशान जनता को जब अपनी आँखों के सामने देखा तो लगा कि शायद अब ये कहना ज़रूरी है – पानी बिन जीवन नहीं, यह जीवन आधार । फिर भी क्यों समझे नहीं, जनता जल का सार ॥ जनता जल का सार, मान ले जल्दी […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।