बापू अगर जिंदा होते तो

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vikram

निगरानी के हत्थे चढ़कर

नेता और अफसर जाते
बापू अगर जिंदा होते तो
ये देखकर मर जाते
सपना देखा था बापू ने
अपना भारत हो सुंदर
नेता अफसर जन सेवा को
चौबीस घंटे हों तत्पर
काम करें कर्मठता से सब
सबका एक सम्मान बने
सत्य ईमान की हो पूजा
और भारत देश महान बने
पर बापू का सुंदर सपना
तोडा़ इन भ्रष्टाचारियों ने
कुछ गंदे नेताओं ने और
चंद भ्रष्ट अधिकारियों ने
नेताजी घोटाला करते
और अफसर जी रिश्वत लेते
आम आदमी थक गय है
कदम कदम पर देते देते
बापू के सोने की चिडि़या
अपने पथ से भटक गई
रिश्वत की खातिर न जाने
कितनों की नौकरी अटक गई
हालात बड़े संगीन हुए
कोई ऐसे वैसे न थे
उनके पास में मेधा थी
पर जेब में पैसे न थे
उन मेधावी बच्चों के
जब सपने चकनाचूर हुए
तब हारकर रिश्वत के हाथों
वे दिहाडी़ मजदूर हुए
ये नौजवान अब मजदूरी को
सऊदी और कतर जाते
बापू अगर जिंदा होते तो
ये देखकर मर जाते
विक्रम कुमार 
 
वैशाली(बिहार)
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।