हवा भी छू के जाये बेरुख़ी से

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anjali sifar
हवा भी छू के जाये बेरुख़ी से
गुज़रता हूँ मैं जब उसकी गली से
है मेरी भूल कर बैठा मुहब्बत
शिक़ायत क्या करूँ मैं अब किसी से
सितारों की रिदा में छुप गयी वो
कहा है चाँद ने क्या चाँदनी से
लुटा बैठा हो जो दिल की ही दौलत
डरेगा वो भला क्या रहजनी से
बढ़ा ले अब कदम घर की भी जानिब
कोई कह दो मेरी आवारगी से
है सूखा अश्क़ जब तो आँख में क्यूँ
अभी तक ठहरी है पूछो नमी से
करे जो बेवफ़ाई हर कदम पर
‘सिफ़र’ चाहे वफ़ाएँ क्यूँ उसी से
#अंजलि ‘सिफ़र’
परिचय-
अंजलि ‘सिफ़र’
नाम-अंजलि ‘सिफ़र’
साहित्यिक उपनाम- ‘सिफ़र’
पता- अम्बाला शहर(हरियाणा)
शिक्षा-एम०ए०(अंग्रेज़ी) एम०एड०
कार्यक्षेत्र-अध्यापन
विधा -कविता,ग़ज़ल,लघुकथा, कहानी, विभिन्न छंदों में काव्य रचना
प्रकाशन-लगभग 25 पत्र ,पत्रिकाओं एवं साझा संकलनों में काव्य एवं गद्य रचनाएं प्रकाशित। 
सम्मान-सोशल मीडिया के साहित्यिक समूहों में रचनाएँ पुरस्कृत, मंचों पर काव्य पाठ हेतु सम्मानित
ब्लॉग-
अन्य उपलब्धियाँ-
लेखन का उद्देश्य-सार्थक सृजन कर समाज और ख़ुद को सकारात्मक पथ पर बढाना
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।