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suman
हम बहुत कुछ करते हैं दिखाने को।
हाथों की लकीरों को आजमाने को।
न सुबह को चैन है न रात को आराम,
हाय ये क्या हो गया इस जमाने को।
जिंदगी की परेशानियां कम हो जाए,
हम चल दिए बुत के आस्ताने को।
दिल में जख्म थे अब गहरे हो गए,
हम उज्र ढूंढते है बस मुस्कराने को।
परिन्दों के घोंसले बने हुए हैं पेड़ों पर,
वहीं पहुँच जाते अपने ठिकाने को।
जमीं में मयस्कर बूंद भर पानी नहीं,
आव चाहिए बस प्यास बुझाने को।
फंस रहे हैं लोग समय के जाल में,
वार तुम भी करो खुद को बचाने को।
शोला भी वही और शबनम भी वही,
सिर्फ आग चाहिए चराग़ जलाने को।
यही जीवन का फलसफ़ा है “सुमन”
सीढ़ियाँ-दर-सीढ़ियाँ चढ़ जाने को।
#सुमन अग्रवाल “सागरिका”
आगरा(उत्तरप्रदेश)

नाम :- सुमन अग्रवाल

पिता का नाम :- श्री रामजी लाल सिंघल
माता का नाम :- श्रीमती उर्मिला देवी
शिक्षा :-बी. ए.
व्यवसाय :- हाउस वाइफ
प्रकाशित रचनाएँ :- 
प्रकाशित रचनाओं का विवरण :-
1.अग्रवंश दर्पण :-“नारी सुरक्षा चूंक कहाँ “,  “महिला सशक्तिकरण “, “500-1000 के नोट बाय-बाय”, “दहेज प्रथा”, “अग्रप्रर्वतक महाराज अग्रसेन जी पर कविता” इत्यादि।
2.हिचकी :- “ये होली का त्यौहार”
3.D.L.A :- “आतंकवाद”, “बालदिवस”, “करवा चौथ”, आतंक का साया, “नववर्ष मुबारक”,  “राष्ट्रप्रेमी” इत्यादि।
4.नारी शक्ति सागर :- “ग़ज़ल”
5. वर्तमान अंकुर नोएडा :- “घर-परिवार, नारी शक्ति, भारतीय लोकतंत्र
साहित्य एक्सप्रेस में – नव संवत्सर
6.सहित्यापीडिया :- माँ
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