है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन !

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alok koushik
है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन !
वो पल वो क्षण
हमारे नयनों का मिलन
जब था मूक मेरा जीवन
तब हुआ था तेरा आगमन
कलियों में हुआ प्रस्फुटन
भंवरों ने किया गुंजन
है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन !
तेरा रूप तेरा यौवन
जैसे खिला हुआ चमन
चांद सा रौशन आनन
चांदनी में नहाया बदन
झूम के बरसा सावन
फूलों में हुआ परागण
है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन !
तेरे पायल तेरे कंगन
कभी छन-छन कभी खन-खन
पड़ें जहां तेरे चरण
खिल जायें वहां उपवन
तू शास्त्रों का श्रवण
तू मंत्रों का उच्चारण
है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन !
तेरा छुअन तेरा आलिंगन
जैसे चंदन का चानन
दे कर तुझे वचन
बन गया तेरा सजन
तेरे संग लगा के लगन
तेरे प्यार में हुआ मगन
है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन !
वो अधरों का चुंबन
हमारे सांसों का संलयन
तेरे जिस्म की तपन
मेरे तन की अगन
अजब सा छाया सम्मोहन
हम भूल गये त्रिभुवन
है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन !
तेरे मन का समर्पण
मेरे प्यार का पागलपन
सुनके तेरा सुमिरन
मैंने दे दी धड़कन
प्यार बन गया पूजन
बना हर गीत भजन
है मुझे स्मरण… जाने जाना जानेमन !
#आलोक कौशिक
                  परिचय:- 
                 नाम- आलोक कौशिक
                 पेशा- अध्यापन एवं स्वतंत्र लेखन
                 पता- कस्तूरी वाटिका, जिला- बेगूसराय, राज्य- बिहार,   
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डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ इन्दौर (म.प्र.) से खबर हलचल न्यूज के सम्पादक हैं, और पत्रकार होने के साथ-साथ शायर और स्तंभकार भी हैं। श्री जैन ने आंचलिक पत्रकारों पर ‘मेरे आंचलिक पत्रकार’ एवं साझा काव्य संग्रह ‘मातृभाषा एक युगमंच’ आदि पुस्तक भी लिखी है। अविचल ने अपनी कविताओं के माध्यम से समाज में स्त्री की पीड़ा, परिवेश का साहस और व्यवस्थाओं के खिलाफ तंज़ को बखूबी उकेरा है। इन्होंने आलेखों में ज़्यादातर पत्रकारिता का आधार आंचलिक पत्रकारिता को ही ज़्यादा लिखा है। यह मध्यप्रदेश के धार जिले की कुक्षी तहसील में पले-बढ़े और इंदौर को अपना कर्म क्षेत्र बनाया है। बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग (कम्प्यूटर साइंस) करने के बाद एमबीए और एम.जे.की डिग्री हासिल की एवं ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियों’ पर शोध किया है। कई पत्रकार संगठनों में राष्ट्रीय स्तर की ज़िम्मेदारियों से नवाज़े जा चुके अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत के २१ राज्यों में अपनी टीम का संचालन कर रहे हैं। पत्रकारों के लिए बनाया गया भारत का पहला सोशल नेटवर्क और पत्रकारिता का विकीपीडिया (www.IndianReporters.com) भी जैन द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।लेखक डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं।