अब धरा पर राम नहीं आयेंगे

0 0
Read Time1 Minute, 1 Second

राम को पूजने वालों
अब धरा पर राम नहीं आयेंगे
तुम्हें ही बनना होगा राम ।
अपनी प्रजा के एक प्रश्न की खातिर
अपनी प्रिया को
त्यागने वाले श्रीराम
बनना होगा तुम्हें।
अपनी मां को दिये
वचन को निभाने की खातिर
सत्ता सुख को त्याग कर
वन प्रस्थान करना।
स्थापित करना होगा
जनता से किए वादों का
अपने कहे वचनों का
साम्राज्य ।
राम की संवेदनशीलता को
आम जन के सुख- दु:ख में।
बनाने होंगे राम राज्य के
मूल्यों को
बिना जनता के लहू की
एक बूंद को बहाये।
राम तो कण कण में है
हर उस कण की
रक्षा का संकल्प लेना होगा।
प्रत्येक हृदय के अधिपति
अनंत सिया-राम को
मंदिर तक सीमित नहीं कर सकता कोई ।

स्मिता जैन

matruadmin

Next Post

चैत्र नवरात्रि पर योगशाला मंच पर भव्य कवि सम्मेलन सम्पन्न

Thu Apr 22 , 2021
गोरे मुखड़े पे घुंघराले बाल मैया जी बड़ी प्यारी लगे शचि साहित्य संगम संस्थान के योगशाला मंच पर 19 अप्रैल 2021 सोमवार को चैत्र नवरात्रि पर आनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया देश के कोने-कोने से सम्मिलित कवि व कवित्रियों के द्वारा काव्यपाठ कर कार्यक्रम को सफल बनाया,इस कार्यक्रम के […]

संस्थापक एवं सम्पादक

डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’

29 अप्रैल, 1989 को मध्य प्रदेश के सेंधवा में पिता श्री सुरेश जैन व माता श्रीमती शोभा जैन के घर अर्पण का जन्म हुआ। उनकी एक छोटी बहन नेहल हैं। अर्पण जैन मध्यप्रदेश के धार जिले की तहसील कुक्षी में पले-बढ़े। आरंभिक शिक्षा कुक्षी के वर्धमान जैन हाईस्कूल और शा. बा. उ. मा. विद्यालय कुक्षी में हासिल की, तथा इंदौर में जाकर राजीव गाँधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अंतर्गत एसएटीएम महाविद्यालय से संगणक विज्ञान (कम्प्यूटर साइंस) में बेचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग (बीई-कंप्यूटर साइंस) में स्नातक की पढ़ाई के साथ ही 11 जनवरी, 2010 को ‘सेन्स टेक्नोलॉजीस की शुरुआत की। अर्पण ने फ़ॉरेन ट्रेड में एमबीए किया तथा एम.जे. की पढ़ाई भी की। उसके बाद ‘भारतीय पत्रकारिता और वैश्विक चुनौतियाँ’ विषय पर अपना शोध कार्य करके पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। उन्होंने सॉफ़्टवेयर के व्यापार के साथ ही ख़बर हलचल वेब मीडिया की स्थापना की। वर्ष 2015 में शिखा जैन जी से उनका विवाह हुआ। वे मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं और हिन्दी ग्राम के संस्थापक भी हैं। डॉ. अर्पण जैन ने 11 लाख से अधिक लोगों के हस्ताक्षर हिन्दी में परिवर्तित करवाए, जिसके कारण वर्ल्ड बुक ऑफ़ रिकॉर्डस, लन्दन द्वारा विश्व कीर्तिमान प्रदान किया गया।